नरेंद्र राणा/ कमल बहल
पूंडरी/ कैथल। विधानसभा चुनाव का शंखनाद होने के बाद जहां राजनीतिक दल सियासी बिसात बिछाने में जुटे हैं, वहीं बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी भी ताल ठोकने को बेकरार हैं। प्रदेश की अधिकतर सीटों पर जहां अलग-अलग दलों का कब्जा रहा है, वहीं पूंडरी विधानसभा सीट पर अब तक निर्दलियों को दबदबा रहा है।
पिछले छह चुनावों में यहां लगातार निर्दलियों ने बाजी मारी है, जबकि अब तक हुए 13 विधानसभा चुनावों में सात बार निर्दलीय जीते हैं। वहीं चार बार कांग्रेस, एक बार जनता दल और एक बार लोकदल ने पूंडरी विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा का यहां से खाता नहीं खुल सका है।
प्रदेश में इस बार कांग्रेस से टिकट मांगने वालों की कतार लंबी हो चुकी है। वहीं भाजपा से भी बड़ी संख्या में दावेदार टिकट के लिए मांग कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने भी प्रदेश की सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है।
वहीं इनेलो और बसपा तथा जजपा से भी प्रत्याशी ताल ठोकते नजर आ रहे हैं। इन सबसे इतर पूंडरी विधानसभा में निर्दलियों अब तक निर्दलियों का दबदबा रहा है। कई निर्दलीय फिर से यहां से चुनाव में ताल ठोक सकते हैं।
इससे पहले वर्ष 1968 में चौ. ईश्वर सिंह निर्दलीय चुनाव लड़कर यहां से जीते थे। इसके बाद ईश्वर सिंह तीन बार कांग्रेस से विधायक रहे हैं। 1998 में ईश्वर सिंह का निधन हो गया। इससे पहले 1996 में नरेंद्र शर्मा ने चौधरी ईश्वर सिंह को हराकर निर्दलियों की ऐसी परंपरा शुरू की जो फिलहाल जारी है।
दूसरी ओर हलके में कोई बड़ा उद्योग या बड़ी परियोजना अभी तक लागू नहीं हो पाई है। यहां तक कि पूंडरी को सब-डिवीजन बनवाने का मुद्दा जो कि पिछले कई प्लान से उठता रहा है, वो इस बार भी अधूरा रह गया है।
कब क्या रही दलों की स्थिति
1968 में स्व. ईश्वर सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी तारा सिंह को हराया था और पूंडरी से निर्दलीय विधायक चुने गए थे। इसके बाद 1972 में कांग्रेस के टिकट पर ईश्वर सिंह ने हरचरण को हराया। 1977 में स्वामी अग्निवेश जनता पार्टी ने कांग्रेस के अनंतराम को हराया। 1982 में कांग्रेस के ईश्वर सिंह ने लोकदल के भाग सिंह को हराया। 1987 में लोकदल के मक्खन सिंह ने कांग्रेस के ईश्वर सिंह को हराया। 1991 में कांग्रेस के ईश्वर सिंह ने मक्खन सिंह को हराया। 1996 में पूर्व मंत्री नरेंद्र शर्मा ने जब कांग्रेस उम्मीदवार स्व. ईश्वर सिंह को हराया तो उसके बाद अब तक पूंडरी में फिर किसी पार्टी का विधायक नहीं बन पाया और पूंडरी को निर्दलीय का गढ़ कहा जाने लगा है। 2000 में तेजवीर सिंह निर्दलीय ने नरेंद्र शर्मा को हराया। 2005 में कौशिक ने इनेलो के नरेंद्र शर्मा को हराया, 2009 में सुलतान ने कांग्रेस के दिनेश कौशिक को हराया। 2014 में कौशिक निर्दलीय ने भाजपा के रणधीर गोलन को हराया। इसी प्रकार पिछले 2019 के चुनाव में निर्दलीय रणधीर सिंह गोलन ने कांग्रेस के सतबीर भाणा को हराया था।