संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। 19 दिसंबर की सुबह पाई गांव में ताऊ-भतीजे की हत्या के बाद से मृतकों और हत्यारों के घरों के पास पुलिस का कड़ा पहरा है। हालांकि गांव में फिलहाल शांति है, मृतक राजेंद्र (38) और उनके ताऊ वीरभान (75) के परिजन अभी भी सदमे में हैं। सुरक्षा के लिए एसपी कैथल ने मृतक के चचेरे भाइयों को पुलिस सिपाही के रूप में तैनात किया है। पाई हत्याकांड का आरोपी वर्तमान में जेल में है। लगभग एक महीने बीत जाने के बाद भी गांव में यह घटना चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।
गांव पाई में तीन दादा की औलादों के बीच 300 गज के प्लाट की यह जमीन विवाद इतनी हिंसक मोड़ लेगी, किसी ने सोचा भी नहीं था। 2012 में राजा और फकीर चंद की हत्या में राजेंद्र समेत 14 लोग नामजद हुए थे और सभी को सजा भी मिली थी।
2019 में राजेंद्र को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई और वह परिवार के साथ खेती-बाड़ी और पशुपालन करके सामान्य जीवन जीने लगे। वहीं, 2012 में मारे गए राजा और फकीर चंद के परिवार ने वर्षों तक रंजिश पाल रखी थी और मौका मिलने पर बदला लेने की योजना बनाई थी। राजेंद्र और उनके परिवार वाले इस दौरान सामान्य जीवन जी रहे थे, जबकि बुजुर्ग वीरभान का 2012 के झगड़े से कोई लेना-देना नहीं था।
यह था मामला
दोनों पक्षों में जमीन के एक टुकड़े को लेकर 2012 में विवाद शुरू हुआ था। उस साल ही पहले हत्याएं हुईं और वहीं से दोनों पक्षों में दुश्मनी बढ़ गई। रंजिश का बदला लेने के क्रम में 19 दिसंबर 2025 को राजेंद्र और उनके ताऊ वीरभान की हत्या कर दी गई।