कैथल। जल्द ही कैथल रेलवे स्टेशन के दिन बहुरेंगे। इसके तहत यहां के प्लेेफार्म को ऊंचा और लंबा किया जाएगा। इसके साथ इसके साथ ही यात्रियों की सुविधा के लिए लाइन पार करने के लिए फुट ओवर ब्रिज बनाया जाएगा।
विकास के ये काम फिलहाल नहीं किए जाएंगे क्योंकि चुनाव अचार संहिता लगी हुई है। चुनाव आचार संहिता के हटते ही अब स्टेशन पर ये विकास कार्य शुरू करवाएं जाएंगे। इनके पूरा होने के बाद अब रेल यात्रियों को भी अच्छी सुविधाएं मिल सकेंगी।
गौरतलब है कि विकास कार्याें के लिए केंद्र ने अपने बजट में कैथल रेलवे स्टेशन पर विकास कार्यों के लिए अनुमति दी है। इस अनुमति के तहत ही विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। यहां आने वाले यात्रियों को गाड़ियों में चढ़ने में बहुत समस्या होती है। चुनाव आचार संहिता हटने के बाद ही रेलवे की ओर से इन कार्याें को पूरा करवाने के लिए निविदा सूचना जारी की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि कैथल का रेलवे स्टेशन करीब 154 साल पुराना है। इसकी स्थापना अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी। उस समय कैथल में चावल का अच्छा व्यापार होने के चलते अंग्रेजों ने वाया कैथल से नरवाना से कुरुक्षेत्र के लिए नई रेलवे लाइन बिछाई थी।
इन 150 साल में अभी तक इस लाइन पर केवल विद्युतीकरण ही हो पाया है। जबकि स्टेशनों पर उम्मीद के मुताबिक विकास कार्य नहीं हो पाया है।
रेलवे ने करीब छह साल पहले कैथल रेलवे स्टेशन पर 2018 में भी पांच करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य करवाए थे। इन कार्याें के तहत पार्किंग, टिकट घर, प्रतीक्षालय, स्टेशन अधीक्षक कक्ष का निर्माण और इंटरलॉक सिस्टम लागू किया गया था। अब करीब पांच छह साल के बाद स्टेशन पर रेलवे की ओर से फिर से विकास कार्य करने के लिए योजना बनाई गई है। संवाद
कैथल रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म लंबा व ऊंचा करने की रेलवे ने योजना बनाई है। इसके तहत रेलवे ने कुछ निर्माण कार्याें को आचार संहिता लगने से पहले अनुमति दी थी। अब आचार संहिता लगी है, इस कारण अभी इन कार्याेंं की निविदा सूचना जारी नहीं की जा सकती है। ऐसे में आदर्श चुनाव आचार संहिता हटने के बाद विकास कार्याें के लिए निविदा सूचना जारी कर दी जाएगी। - जेके अरोड़ा, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, कैथल।
प्लेटफार्म छोटा होने से होती है परेशानी
रेल यात्री नीतिश कुमार ने बताया कि इस समय कैथल रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म काफी छोटा है। प्लेटफार्म छोटा होने के कारण यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। क्योंकि रात के समय साबरमती जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन के आधे डिब्बे प्लेटफार्म के नीचे रहते हैं। क्याेंकि इस ट्रेन के 16 डिब्बे हैं। इसके साथ ही अन्य ट्रेनों में भी प्लेटफार्म नीचा होने के कारण बच्चों और बुजुर्गाें को दिक्कत होती है।