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Kaithal News: फल्गु तीर्थ का उल्लेख महाभारत, नारद पुराण में भी

Sat, 20 Sep 2025 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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52 तीन दिवसीय मेले के दौरान सजा फल्गु तीर्थ   संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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पूंडरी। फरल गांव में विश्व प्रसिद्ध

फल्गु तीर्थ पर 19 सितंबर से शुरू हो गया है। यहतीन दिवसीय मेला 21 सितंबर तक चलेगा। यह मेला अमावस्या पर लगने वाले विशाल 15 दिवसीय मेले जैसा नहीं होगा, लेकिन महत्व में कोई कमी नहीं रहेगी। फल्गु तीर्थ का उल्लेख महाभारत, नारद पुराण में भी आता है।

गौरतलब है कि महर्षि फल्गु तीर्थ सेवा ट्रस्ट की पहल पर पिछले दो वर्षों से तीर्थ पर हर साल मेला आयोजित हो रहा है। पंडित भीम शर्मा ने बताया कि तीर्थ पर विशाल मेला वर्ष 2018 के बाद वर्ष 2028 में लगेगा। इस तीन दिवसीय मेले का आयोजन प्राचीन फल्गु तीर्थ के पश्चिम घाट पर पार्क के पास किया जाएगा। इस वर्ष तीर्थ में बने फल्गु ऋषि और भगवान विष्णु के मंदिर आकर्षण का केंद्र रहेंगे। प्राचीन फल्गु मंदिर विश्व प्रसिद्ध है और महाभारत एवं पौराणिक काल में इसकी महत्ता अपने चरमोत्कर्ष पर थी। महाभारत और वामन पुराण में इस तीर्थ का उल्लेख देवताओं की विशेष तपोस्थली के रूप में मिलता है। तीर्थ का महात्म्य बताते हुए कहा गया है कि जो व्यक्ति लाखों अश्वमेध यज्ञ करता है, वह भी उतना फल प्राप्त नहीं करता जितना फल्गु तीर्थ में स्नान कर तर्पण और पिंडदान करने से मिलता है।
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फल्गु तीर्थ की मान्यता

फल्गु तीर्थ कैथल से लगभग 21 किमी दूर फरल गांव में स्थित है। माना जाता है कि फरल ग्राम का नाम फलकी वन से आया है, जहां फल्गु ऋषि निवास करते थे। वामन पुराण में काम्यक वन, अदिति वन, व्यास वन, सूर्यवन, मधुवन, शीत वन और फलकीवन का उल्लेख है। यह सभी सात वन प्राचीन कुरुक्षेत्र भूमि के प्रमुख वन माने जाते थे। महाभारत, वामन पुराण, मत्स्य पुराण और नारद पुराण में फल्गु तीर्थ का वर्णन देवताओं की तपस्या की विशेष स्थली के रूप में मिलता है।
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