संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। शहर में बंदरों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। झुंड में आने वाले ये बंदर घरों के बाहर रखे सामान, गमलों को तोड़ डालते हैं। घरों के बाहर काम कर रही महिलाओं और खेल रहे बच्चों पर हमला कर उन्हें घायल कर रहे हैं। पिछले दिनों वार्ड नंबर-16 में घर के आंगन में काम कर रही एक महिला पर बंदरों के एक झुंड में हमला कर उसे बुरी तरह से काटकर घायल कर दिया था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घर की छतों पर कपड़े सुखाने गई महिलाओं और बच्चों पर बंदर अचानक हमला कर देते हैं। ऐसे हमलों में महिलाएं छत से गिरकर घायल हो रही है और कई बार उनकी जान जाने का खतरा भी बना रहता है। हर रोज हो रहे बंदरों के हमलों से पालिका प्रशासन अनजान बना है। चीका वासी दिलबाग सिंह, रोशन लाल, सोनू, रमेश आदि ने नगर पालिका प्रशासन से मांग रखी है कि बंदरों को पकड़ कर शहर से दूर भेजा जाए।
बंदरों की ओर से लोगों को काटने और घरों के बाहर नुकसान करने के सूचना उन्हें मिली है। इन बंदरों को पकड़ कर शहर से बाहर करने के लिए सोमवार से कार्यवाही शुरू करवाई जाएगी। जल्द ही शहर के लोगों को बंदरों से मुक्ति दिला दी जाएगी। -पूजा शर्मा, नपा उपाध्यक्ष, चीका।
आतंक से कैसे बच सकते हैं...
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बंदर खाने की वस्तु छीनने के लिए आप पर झपटे तो उससे मुकाबला न करें बल्कि उस वस्तु को दूर फेंक दें।
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कूड़ादान में कूड़ा डालने के बाद उसके ढक्कन को अच्छी तरह बंद करें।
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बंदर से नजर न मिलाएं।
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खाने का सामान पॉलीथिन के लिफाफों की बजाय जूट के बैग में रखना चाहिए।