संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। पेयजल समस्या पर गांव बात्ता के लोगों में भारी रोष बना हुआ है। सुनील, अनूप, कुलदीप, अमित, कमला, रोशनी व मनीषा का कहना है कि उन्हें जो पानी जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से आपूर्ति किया जा रहा है वह पीने के योग्य नहीं है। पानी के कारण से इंदिरा कॉलोनी के आसपास के क्षेत्र में लोगों में त्वचा, बाल व हड्डियों के रोग फैल रहे हैं।
सुनील कुमार ने बताया कि जो पानी विभाग द्वारा उन लोगों को पीने के लिए दिया जा रहा है उसे मानव का पीना तो दूर उसे पशु भी नहीं पी सकते। उन लोगों ने बार बार विभाग के चक्कर लगाए पर कोई सुनवाई ही नहीं हो रही। विभाग ने चौशाला रोड पर जो बोर लगाया है उसे केवल 100 फुट पर ही लगाया है। उस बोर का पानी 15 दिन तो बहाया गया उसके बाद उसी पानी की आपूर्ति लोगों को करना शुरू कर दिया।
थक हार कर कॉलोनी के लोगों ने अपने स्तर पर पानी की प्रयोगशाला में जांच करवाई तो परिणाम चौंकाने वाले मिले। पानी में टीडीएस, फ्लोराइड, हार्डनेस, मग्रिशियम, सल्फेट, नाइट्रेट सभी बहुत अधिक मात्रा में पाए गए।
इसके आधार पर पानी किसी भी सूरत में पीने योग्य नहीं पाया गया। सुनील ने बताया कि मामला केवल इतना ही नहीं बल्कि जो पाइप बोर से आवासों तक आती हैं वे भी कई स्थानों पर टूटी हैं जिससे गंदगी और उस पानी में शामिल हो रही है। मनीषा व रेखा ने कहा कि उनके सिर के बाल ही उडऩा शुरू हो गए हैं। कमला, रोशनी व सुभाष ने कहा कि जोड़ों में दर्द की परेशानी बनी हुई है।
गांव बात्ता में तैनात जनस्वास्थ्य विभाग के कनिष्ठ अभियंता मनोज कुमार ने कहा कि विभाग के पास नहरी पानी का भी स्टाकॅ है। नहरी पानी में बोर का पानी मिला कर ही गांव में पेयजल आपूर्ति किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सेंपल रिपोर्ट के बारे में उन्हें नहीं पता। यदि
उक्त बोर की रिपोर्ट सही नहीं है तो विभाग दूसरा बोर लगा सकता है। जो पाइपें टूटी हैं उन्हें तत्काल प्रभाव से ठीक करवाया जा रहा है।