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Kaithal News: बढ़सीकरी कलां के लोग बुलंद करेंगे आवाज

Thu, 14 Nov 2024 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। ग्रामीण अंचल मेंं पेयजल प्रबंधन, गंदे पानी की निकासी और साफ-सफाई का मुद्दा अब तूल पकड़ने लगा है। इसके तहत बढ़सीकरी कलां गांव के ग्रामीणों ने सरकार की नीति अनुसार बुनियादी सुविधाएं न जुटाने वाले अधिकारियों के खिलाफ शीर्ष स्तर पर आवाज बुलंद करने का फैसला लिया है।

नाराज लोगों का कहना है कि अभिान के तहत गांवों की फोटो-वीडियोग्राफी की जा रही है। प्रभावी ढंग से आवाज उठाने का यह बीड़ा गुरदेव सिंह, सोहन लाल, प्रवीण कुमार, गुरमेज सिंह, कुलदीप सिंह व मलकीत सिंह ने उठाया है।
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इन सभी ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र एवं राज्य सरकार के ग्रामीण विकास, पेयजल प्रबंधन, गंदे पानी की निकासी और स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं के लिए जारी बजट का हिसाब-किताब मिलना जरूरी है। गांवों में चरमराई सफाई व्यवस्था, ठप्प गंदे पानी की निकासी और कमजोर पेयजल प्रणाली और अन्य बुनियादी सुविधाएं हवा हैं।

इसके मद्देनजर ग्रामीणों ने प्रशासन सेे सरकार द्वारा विकास के लिए जारी बजट का विवरण सार्वजनिक करवाने का निर्णय लिया है। साथ ही इसके लिए जिम्मेवार अधिकारियों से जवाब तलब के लिए गांव के लोग ग्रामीण स्तर पर विशेष सत्र शुरू करने की मांग प्रदेश मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि साफ-सफाई न होने के कारण बीमारियों का भय लोगों को सता रहा है। सफाई व्यवस्था बहाल करने के नाम पर गांव में केवल दो सफाई कर्मी हैं। आज भी घरों का गंदा पानी गलियों में खुले में बहता है। पानी निकासी व जल संरक्षण की कोई योजना दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही। सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं का कहना है कि कलायत विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ जिला के अन्य इलाकों मेंं सबसे बड़ा झाला पेयजल व पानी निकासी के नाम पर है।

नई विकास योजनाओं की बजाए जन स्वास्थ्य के कुछ अधिकारियों की रुचि रिपेयर कार्यों मेंं है। इसके पीछे मंशा फर्जी बिलोंं के माध्यम वे व्यापक स्तर पर सरकार की आंखों में धूल झोंकना है। इस संबंध में शपथ पत्र सरकार को भेजा जाएगा। यदि इस मामले मेंं सिरे से जांच की जाए तो फर्जी बिलों का बड़ा स्कैम उजागर हो सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से सरकार की ईमानदारी की नीति की मजबूती के लिए जिला में जन स्वास्थ्य विभाग को जारी बजट, भुगतान और धरातल पर हर छोटे-बड़े कार्य की जांच करवाने की मांग की। जिस प्रकार छोटे गांवों में पेयजल प्रबंधन के प्रति लापरवाही व 10 हजार से अधिक की आबादी वाले गांवों में महाग्राम योजना के प्रति ढि़लाई सामने आ रही है वह जन स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। युवाओं का कहना है कि गांव में वर्षों से व्याप्त समस्याओंं के निवारण के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जा रही है। सुविधाओं की बजाए केवल आश्वासन मिले हैं। समझ नहीं आ रहा कि आखिकार और कितनी गंभीर समस्याओं से उन्हें पंजा लड़ाना है। ग्रामीण विकास की योजनाओं के धरातल पर न पहुंचने के लिए जो अधिकारी जिम्मेवार हैं उनके खिलाफ कार्यवाही जरूरी है।

उधर, कलायत जन स्वास्थ्य विभाग उप मंडल अभियंता इंद्राज पंवार ने बताया कि विभाग सरकार की योजनाओं को लेकर गंभीर है। शीर्ष अधिकारियों की निगरानी मेंं पेजयल प्रबंधन और गंदे पानी की निकासी को लेकर प्रभावी ढंग व पारदर्शिता से कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गांव से शहरी स्तर तक हर कोई के प्रति विभाग संजीदगी का परिचय देता आ रहा है। व्यवस्था को मजबूती देना विभाग का ध्येय है। किसी प्रकार के गोलमाल के आरोपों को सिरे से नकार दिया।

अध्यक्ष बोलीं- जन प्रतिनिधि ग्रामीण विकास के प्रति गंभीर

कलायत ब्लाक समिति की अध्यक्ष ज्योति बढ़सीकरी ने बताया कि ग्राम पंचायत, ब्लाक समिति और जिला परिषद के माध्यम सेे ग्रामीण विकास से जुड़ी जो-जो योजनाएं हैं उनका ब्यौरा अधिकारियों से मांगा जाएगा।
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उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा विकास के लिए जारी राशि के तहत जारी निर्माण कार्यों के भुगतान में विलंब करने वाले अधिकारियों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भेजने का निर्णय जन प्रतिनिधियों ने लिया है।
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