संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। पूर्व संसदीय सचिव एवं इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष रामपाल माजरा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पिछले दो माह के दौरान दो लाख से अधिक बुजुर्गों की बुढ़ापा पेंशन काट दी गई है। इस गंभीर समस्या पर 20 फरवरी को पंचकूला में इनेलो प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन करेगी, जिसमें प्रदेशभर के बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगी।
सेक्टर-20 स्थित अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए रामपाल माजरा ने कहा कि अनेक ऐसे गरीब परिवार हैं जिनके घर में साइकिल तक नहीं है, लेकिन उनकी फैमिली आईडी में कई-कई गाड़ियां दर्ज कर दी गईं, जिसके चलते उनकी बुढ़ापा पेंशन बंद कर दी गई।
परेशान बुजुर्ग समाज कल्याण विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्या का समाधान करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि चौधरी देवीलाल ने बुजुर्गों के सम्मान के लिए 100 रुपये मासिक पेंशन की शुरुआत की थी, उस समय 100 रुपये की कीमत आज के 15 हजार रुपये के बराबर थी। इनेलो किसी भी सूरत में बुजुर्गों की पेंशन नहीं कटने देगी। हजारों की संख्या में बुजुर्ग आंदोलन में शामिल होंगे और हर पात्र बुजुर्ग को पेंशन दिलवाकर ही दम लिया जाएगा।
रामपाल माजरा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पीआर धान खरीद के दौरान करीब पांच हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। किसानों से पीआर धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद नमी का बहाना बनाकर 1800 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदा गया।
माजरा ने कहा कि किसानों को कच्ची पर्चियां दी गईं, जबकि जे-फॉर्म 2300 और 2320 रुपये के बनाए गए और सरकार से पूरा भुगतान उठा लिया गया। इस घोटाले में आढ़ती, मार्केट कमेटियां, खरीद एजेंसियां और राइस मिलर्स शामिल हैं, जबकि सरकार ने पूरे मामले को दबाने का काम किया। रजिस्ट्री में 800 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार चरम पर है और अधिकारी जनता का पैसा डकार रहे हैं।
वीबी-जी राम जी योजना से नहीं मिलेगा रोजगार
रामपाल माजरा ने कहा कि चौधरी देवीलाल द्वारा शुरू की गई काम के बदले अनाज योजना को बाद में मनरेगा और नरेगा के रूप में मजबूत किया गया, लेकिन भाजपा सरकार ने इसका नाम बदलकर वीबी-जी राम जी योजना कर दिया। इस योजना को केंद्र प्रायोजित घोषित कर एमजीएनआरईजीएस का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया है। अब केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में फंड बंटेगा, जबकि प्रदेश सरकार पहले ही कर्ज में डूबी हुई है। इससे ग्रामीण मजदूरों को रोजगार मिलना मुश्किल हो जाएगा।