संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। बात्ता गांव में 111 धुनियों के बीच चल रही तपस्या का मंगलवार को समापन हुआ। यह कठिन साधना महंत अश्वनी पुरी ने सात मई से शुरू की थी। तपस्या रोजाना दोपहर 12 से दोपहर दो बजे तक की जाती रही। यह साधना क्षेत्र की सुख, शांति और समृद्धि के लिए समर्पित थी।
समापन के अवसर पर गांव की महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। मंगलवार को बाबा राजपुरी मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। साधु-संतों को भी भोजन कराया गया, जो साधु समाज से आए थे।
इस मौके पर लदाना से बाबा राजपुरी डेरे के महाराज दूज पुरी, बात्ता डेरे के महंत नरेश पुरी महाराज, महंत प्यार पुरी, महंत मथुरा पुरी, राजेश्वर पुरी सहित बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद थे।
तपस्या के दौरान भजन-कीर्तन, धार्मिक प्रवचन और अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। महाराज दूज पुरी और महंत नरेश पुरी महाराज ने बताया कि यह आयोजन क्षेत्र की भलाई के लिए किया गया, जिसमें क्षेत्रवासियों का भरपूर सहयोग मिला।
बात्ता निवासी एडवोकेट सुल्तान सिंह और अरुण राणा ने बताया कि 111 धुनियों के बीच महंत अश्वनी पुरी ने 41 दिन तक भयंकर गर्मी में धूनी तपस्या की। इस साधना के दौरान महंत के चारों ओर धधकती अग्नि रहती थी, साथ ही सूर्य की तपन भी सहनी पड़ती थी। यह साधना शरीर और मन दोनों की कठिन परीक्षा होती है, जिसे बहुत कम साधु-संत ही पूरा कर पाते हैं।