संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की होनहार मुक्केबाज पायल ने फिर साबित किया कि मेहनत, हौसला और आत्मविश्वास के आगे हर बाधा छोटी पड़ जाती है। कभी अपने गांव और समाज की संकीर्ण सोच को चुनौती देने वाली पायल आयरलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कैंप में भाग लेने पहुंच चुकी हैं। यह कैंप 30 जनवरी से 10 फरवरी तक चलेगा। इसमें पायल 51 किलोग्राम भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
इससे पूर्व रोहतक में आयोजित चयन ट्रायल के दौरान पायल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी जगह पक्की की थी। ट्रायल के एक अहम मुकाबले में उन्होंने आंध्र प्रदेश, विशाखापट्टनम (एनसीओई) की मुक्केबाज को 5-0 के अंतर से पराजित कर चयनकर्ताओं को प्रभावित किया।
पायल बचपन से ही खेलों के प्रति जुनूनी रही हैं। वह अपने बॉक्सिंग सेंटर में आने वाली पहली लड़की थीं और शुरुआत से ही उनके भीतर जीत का जज्बा झलकता था। सीमित संसाधनों और सामाजिक दबावों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी तथा निरंतर मेहनत के दम पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। पायल एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता राजमिस्त्री हैं जबकि माता गृहिणी हैं। पायल छह बहनों और एक भाई के साथ बड़े संयुक्त परिवार में पली-बढ़ी हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद माता-पिता ने हमेशा बेटी के सपनों को प्राथमिकता दी तथा हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। परिवार का यही समर्थन पायल की सबसे बड़ी ताकत बना। अब तक पायल जूनियर वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप तथा विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।
आयरलैंड में चल रहे प्रशिक्षण कैंप के बारे में पायल ने कहा कयह अवसर मेरे लिए गर्व का पल है। मैं यहां कड़ी मेहनत कर अपने खेल को निखारूंगी तथा देश का नाम रोशन करने का पूरा प्रयास करूंगी। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, परिवार और कोच अमरजीत को दिया।
यह तो सिर्फ शुरुआत है। यदि पायल इसी तरह अनुशासन और मेहनत बनाए रखती हैं, तो वह आने वाले समय में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और बेहतर प्रदर्शन करेंगी। उनकी ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर देश को पदक दिलाने की पूरी क्षमता है। पायल की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है तथा बेटियों को संदेश देती है कि वे हर परिस्थिति में आगे बढ़कर इतिहास रच सकती हैं। -अमरजीत सिंह, कोच