संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के पहले पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित पैरालंपिक तीरंदाज हरविंदर सिंह ने संघर्षों से कभी मुंह नहीं मोड़ा और परेशानियों का डटकर सामना किया। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और देश के लिए खेल कर नाम रोशन किया। अब हरविंदर सिंह पद्मश्री अवार्ड पाने वाले कैथल के एकमात्र खिलाड़ी भी बने हैं।
हरविंदर के माता-पिता उन्हें शिक्षक बनाना चाहते थे, लेकिन हरविंदर की रुचि ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाया। हरविंदर ने बताया कि उनके पिता सरदार परमजीत सिंह, एक किसान है। जबकि उनकी माता हरभजन कौर का 2018 में देहांत हो गया था। उनके देहांत के बाद ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता था। उन्होंने बताया कि स्नातकोत्तर करने के बाद वे 2017 में यूजीसी की परीक्षा भी पास कर चुके हैं, लेकिन वे सरकारी नौकरी हासिल न कर खेलों में ही क्षेत्र व देश का नाम रोशन करना चाहते थे। यह मुकाम अब हासिल भी कर लिया है।
हरविंदर ने बताया कि जब वे महज डेढ़ साल के थे तो उन्हें डेंगू हो गया था और इसके उपचार के लिए उन्हें इंजेक्शन लगाए गए थे। दुर्भाग्य से इन इंजेक्शन के कुप्रभावों से उनके पैरों की गतिशीलता चली गई थी। बावजूद इसके उन्होंने पेरिस पैरालंपिक के फाइनल में पोलैंड के लुकास सिसजेक को 6-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास बना दिया था। तीरंदाजी में भारत का पहला पैरालंपिक स्वर्ण पदक था।
हरविंदर सिंह ने बताया कि उसके लिए बड़ी खुशी का पाल है जो उन्हें पद्मश्री अवार्ड मिला। हरविंदर सिंह का जन्म 25 फरवरी 1991 को हरियाणा के कैथल में हुआ था। अजीत नगर के किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले हरविंद्र जब डेड़ साल के थे तो उन्हें डेंगू हो गया था और इसके उपचार के लिए उन्हें इंजेक्शन लगाए गए थे। दुर्भाग्य से इन इंजेक्शन के कुप्रभावों से उनके पैरों की गतिशीलता चली गई।
हरविंदर को शुरुआत में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन वह फिर भी तीरंदाजी में आ गए। 2017 पैरा तीरंदाजी विश्व चैंपियनशिप में डेब्यू में सातवें स्थान पर रहे। फिर 2018 जकार्ता एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे और कोविड 19 के कारण लगे लॉकडाउन में उनके पिता ने अपने खेत को तीरंदाजी रेंज में बदल दिया था, ताकि वह ट्रेनिंग कर सकें।
उन्होंने बताया कि हम फसल काट चुके थे और खेत खाली थे तो मेरे पिता ने वहां तीरंदाजी रेंज तैयार करने में मदद की। इस तरह सुरक्षित रूप से मैं अभ्यास कर सका। जून 2024 में पैरा तीरंदाजी विश्व रैंकिंग स्पर्धा में उन्होंने चेक गणराज्य में कांस्य पदक जीता था। इससे पहले अप्रैल 2024 में विश्व तीरंदाजी ओशिनिया 2024 पैरा ग्रैंड प्रिक्स में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में कांस्य पदक जीता था।
ये हैं हरविंदर सिंह की उपलब्धियां-
हरविंदर सिंह वे तीरंदाज हैं, जिन्होंने रोहतक में 2016 में हुई पहली पैरा आर्चरी नेशनल प्रतियोगिता में कांस्य पदक, तेलंगाना में 2017 में दूसरी पैरा आर्चरी नेशनल प्रतियोगिता में रजत पदक, 2018 में इंडोनेशिया में हुई एशियन पैरा गेम्स में भारत के लिए रिकर्व इवेंट में स्वर्ण पदक हासिल किया था। वह छह बार देश का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। एशियन पैरा चैंपियनशिप 2019 में कांस्य पदक हासिल किया था। जून 2019 में नीदरलैंड में आयोजित विश्व पैरा आर्चरी चैंपियनशिप में पैरालंपिक 2020 के लिए कोटा हासिल किया था। इसके बाद 2020 पैरालंपिक में कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा बीजिंग में 2017 में हुई विश्व पैरा आर्चरी में सातवां स्थान। थाईलैंड में 2019 में हुई तीसरी एशियन पैरा आर्चरी के टीम इवेंट में कांस्य पदक। रोहतक में 2019 में तीसरी पैरा आर्चरी नेशनल प्रतियोगिता सिल्वर मेडल हासिल किया था। पेरिस पैरालंपिक 2024 में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। चार सितंबर को मेन्स इंडिविजुअल रिकर्व ओपन के फाइनल मे 33 वर्षीय हरविंद्र ने पोलैंड के लुकाज सिजेक को पराजित कर इतिहास रच दिया था।
अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री ले रहे हैं हरविंदर
तीरंदाजी में सफलता के साथ वह अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री भी ले रहे हें। हरविंदर सिंह ने टोक्यो पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। यह तीरंदाजी में भारत का पैरालंपिक का पहला पदक था। उन्होंने कोरियाई तीरंदाज को शूट ऑफ में 6-5 से पीछा छोड़ा और पदक अपने नाम किया था।