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Kaithal News: अभिभावकों ने स्कूल के मुख्य गेट पर की तालाबंदी

Wed, 10 Apr 2024 03:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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ढांड। सरकारी स्कूल खनौदा में अध्यापकों की कमी के चलते अभिभावकों ने स्कूल के मुख्य गेट का ताला लगाकर प्रदर्शन किया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्कूल के गेट पर लगा ताला खोलने के लिए ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण एक ही बात पर अडिग रहे कि जब तक शिक्षा विभा की ओर से उनके स्कूल में अध्यापकों की कमी को दूर नही किया जाता तब तक ताला नही खोलेंगे।

नाराज ग्रामीण इकबाल सिंह, जीत सिंह, बाबू राम, बनारसी ने बताया कि कक्षा छठी से 10वीं के बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल में केवल चार अध्यापक है। इस वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि स्कूल में विज्ञान, संस्कृत व अंग्रेजी के अध्यापक ही नहीं है। जिससे बच्चे इन विषयों की पढ़ाई नही कर पाते है और उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। काफी देर बाद कैथल से बीईओ नरेश कुमार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की बात को सुना।
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बीईओ ने कहा कि आपकी समस्या जायज है, लेकिन इस समय चुनाव आचार संहिता के चलते किसी भी अध्यापक का तबादला नही किया जा सकता। फिलहाल अस्थाई तौर पर अध्यापकों का प्रबंध कर दिया जाएगा। इससे ग्रामीण सहमत हो गए और ताला खोल दिया। इसके बाद बच्चे स्कूल में प्रवेश हुए और अपनी-अपनी कक्षाओं में जाकर बैठ गए।
पांचवीं कक्षा का प्रमाणपत्र न मिलने का मुद्दा गहराया
कलायत। कलायत में एक छात्र की ओर से अपनी सरकारी प्राथमिक पाठशाला से आरटीआई के माध्यम से मांगें गए पांचवीं कक्षा के प्रमाणपत्र को लेकर अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। हरियाणा राज्य सूचना आयोग तक पहुंचे इस मामले स्कूल की हेड टीचर ने वर्ष 1993-1994 में स्कूल की गली मेंं बाढ़ का पानी भर जाने से रिकॉर्ड गलने-सड़ने का जवाब दिया है।
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इसके आधार पर उन्होंंने प्रार्थी का प्रमाणपत्र जारी करने में असमर्थता जाहिर की है। आरटीआई प्रार्थी सुरेंद्र वेद इसे भ्रामक जवाब करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि कलायत क्षेत्र मेंं वर्ष 1993-94 की बजाय 1995-96 में बाढ़ आई थी। मामले में खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश सिंगला ने कहा कि आरटीआई का यह मामला काफी समय से उनके संज्ञान में है। उन्होंने स्कूल की हेड टीचर को नियम के अनुसार जानकारी देने के निर्देश दिए थे। उन्होंने वर्ष 1993-1994 मेंं बाढ़ के कारण रिकॉर्ड खराब होने का जवाब दिया है। वे दोनों पक्षों से जुड़े तथ्यों की समीक्षा कर रहे हैं। संवाद
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