गांव छौत के किसान कुलदीप धारीवाल ने पराली की समस्या का नायब तरीका ढूंढ निकाला है। उसने पराली से एक ऐसा उत्पाद क्रॉप रिचार्जर बनाया है। जिसका छिड़काव करने पर फसल की उत्पादकता बढ़ेगी और पराली को जलाने की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कुलदीप धारीवाल के प्रोजेक्ट को शेरे कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय ने टेस्टिंग के बाद मोहर लगा दी है। जहां उस पर दो माह तक टेस्ट किए गए। अब कुलदीप धारीवाल के प्रोजेक्ट को प्लांट लगाने की अनुमति को कृषि मंत्रालय में भेजा गया है। जहां से मंजूरी मिलने के बाद उसे बजट मिलेगा और वह अपना प्लांट लगा सकेगा।
ऐसे बनाया है क्रॉप रिचार्जर : कुलदीप ने बताया कि पराली जलाने का किसानों पर लगातार आरोप लगाया जा रहा है। ऐसे में उसने एक ऐसा उत्पाद बनाने की सोची की कि पराली का प्रयोग खेत में ही हो जाए। इसके लिए उसने एक गड्डा खोद कर 90 प्रतिशत पराली व 10 प्रतिशत अन्य मटीरियल का प्रयोग किया और उसे गड्डे में दबा दिया। जिसमें से लिक्विड निकाल कर खेत में फसल के लिए रिचार्जर के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है। एक एकड़ में यह दो लीटर डाला जाए तो इसके चौंकाने वाले परिणाम सामने आते हैं। इसके प्रयोग से खाद कम डालने की जरूरत होगी और उत्पादन भी काफी अच्छा होगा।
उसने यह उत्पाद बनाकर प्रयोग के लिए शेरे कश्मीर विश्वविद्यालय में भेजा था। जहां इस पर दो माह तक शोध हुआ। वे स्वयं भी वहीं पर रहे और विश्वविद्यालय के स्टॉर्ट-अप कार्यक्रम के तहत ट्रेनिंग ली। वहां इस उत्पाद की केमिकल वेल्यू भी निकाली गई। जिसमें कई तरह के पोषक तत्वों की काफी अच्छी मात्रा बताई गई है।
शेरे कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय के सॉयल साइंस में प्रो. इन हेड डा. विकास शर्मा ने बताया कि कुलदीप धारीवाल ने पराली से बने एक उत्पाद को यहां प्रस्तुत किया था। जो यहां स्टॉर्ट-अप प्रोग्राम में आए थे। उनके निवेदन पर उन्होंने उस क्रॉप रिचार्जर नामक उत्पाद का टेस्ट करके रिपोर्ट बनाकर दी है। इसका एक तरह से न्यूट्रेेंट एनलाइसिस करके दिया है। जिसमें न्यूट्रेंट स्टेटस काफी अच्छा निकला है। इसकी सबसे सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे बनाने के लिए पराली का प्रयोग किया है। जो आज कई राज्यों में समस्या बनी हुई है। इससे जहां फसलों में लाभ मिलेगा, वहीं पराली जलाने जैसी समस्या भी खत्म होगी और पर्यावरण में भी लाभ पहुंचेगा।