संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। पैरालंपिक तीरंदाजी में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले हरविंदर सिंह राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में सम्मान लेने के बाद बुधवार देर शाम अपने घर गुहला के अजीमगढ़ गांव में पहुंचे। उनके घर पहुंचने के बाद परिवार सहित ग्रामीणों में जश्न का माहौल रहा। अजीमपुर गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया।
हरविंदर के पिता परमजीत सिंह ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर बहुत गर्व है। उसने न केवल हमारा, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया। वहीं, हरविंदर की पत्नी मनप्रीत कौर ने भावुक होते हुए कहा कि अब परिवार के संघर्षों का फल मिला है। जब कोई अवार्ड मिलता है तो दिल को सुकून और गर्व महसूस होता है।
हरविंदर ने 2012 में पंजाब यूनिवर्सिटी पटियाला से तीरंदाजी की शुरुआत की थी। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने 2018 के पैरा एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। 2021 में भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।
वर्ष 2023 में चीन में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में कांस्य पदक और 2024 में पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर हरविंदर ने इतिहास रच दिया। वे पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय
तीरंदाज बने।
हरविंदर की इस उपलब्धि ने न केवल कैथल बल्कि पूरे देश को गर्व का मौका दिया है। उनकी कहानी मेहनत, लगन और देशभक्ति का जीवंत उदाहरण है। हरविंदर ने कहा कि उन्होंने अपनी कमजोरी को अपना औजार बनाया और संघर्ष किया यहां तक कि जब कोरोना के समय सभी अकादमी बंद हो गई थी तो वह निराश नहीं हुए और इस आपदा को आपदा को अवसर में बदला।
वह बताते हैं कि उनके पिता ने सहयोग किया और खेतों की जमीन को समतल करके तीरंदाजी के लिए लक्ष्य लगाकर मैदान बना लिया और वहां लगातार इसका अभ्यास किया और वही मेहनत का नतीजा है कि आज सरकार ने पद्मश्री से नवाजा है इसके लिए वह सरकार का भी धन्यवाद करते हैं कि उसने उनकी मेहनत को सराहना और सम्मान दिया।