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पंचायत चुनाव : अनपढ़ उम्मीदवारों को झटका

Thu, 10 Dec 2015 11:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
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सुप्रीमकोर्ट के फैसले के साथ ही जिले में पंचायत चुनाव लड़ने की उम्मीद लगाए बैठे अशिक्षित और कम पढ़े-लिखे उम्मीदवारों की आस लगभग खत्म हो गई है। जिले में 3355 पदों पर पंचायत प्रतिनिधियों का चुनाव होना है। इनमें से तीन ब्लॉकों के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
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इन उम्मीदवारों में अशिक्षित और कम पढ़े-लिखे उम्मीदवार भी शामिल हैं जिनके नामांकन अब रद हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जहां सत्ता पक्ष खुश है वहीं कई राजनेता इस फैसले को उन लोगों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे हैं, जो शैक्षणिक योग्यता अथवा अन्य शर्तों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

24 जुलाई को हुआ था कार्यकाल समाप्त : जिले में 3196 पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हुआ था। तभी से पंचायतों में बीडीपीओ कार्यभार देख रहे हैं। इस बार 3355 पंचायत प्रतिनिधियों का चयन होना है। इनमें 277 ग्राम पंचायतों में 277 सरपंच, 2915 पंचायत सदस्य, 142 ब्लॉक समिति सदस्य और 21 जिला परिषद सदस्यों का चुनाव होगा जिसमें 1200 से ज्यादा महिला सदस्यों का भी चयन किया जाएगा।
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जिले भर में 15 जुलाई को फाइनल हुए पंचायत चुनाव के लिए वोटर लिस्ट के हिसाब से 5 लाख 61 हजार 479 लोग वोट डालेंगे जिसमें कुल 3 लाख 3 हजार 417 पुरुष और 2 लाख 58 हजार 62 महिला मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

जिले में 278 गांवों में आधे से ज्यादा उम्मीदवारों की तैयारी धरी की धरी रह गई हैं। पिछले प्लान में 270 सरपंचों में से केवल 93 सरपंच ही दसवीं पास थे। 41 सरपंच अनपढ़ थे। वहीं जिले भर में केवल 93 सरपंच दसवीं तक पढ़े लिखे थे। 106 सरपंच दसवीं से कम पढ़े-लिखे थे। तो 27 ने बारहवीं पास की हुई थी। 15 सरपंच बीए पास थे तो तीन ने एमए भी की हुई थी।

15 से 19 अक्तूबर तक जिले में पहले चरण में कैथल, कलायत एवं सीवन ब्लॉक के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। जिसमें 5636 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे। इनमें जिला परिषद के 274, ब्लॉक समिति के 481, सरपंच के लिए 1412 एवं पंच के लिए 3469 उम्मीदवार मैदान में आ चुके हैं। इनमें शिक्षित एवं शर्तें पूरा न करने वाले दोनों ही तरह के उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं।

जिले में चार अक्तूबर को पूंडरी, गुहला एवं राजौंद एवं 18 अक्तूबर को कैथल, कलायत एवं सीवन ब्लॉकों में चुनाव की तैयारी थी जिसके लिए 1102 बूथ बनाए गए हैं। इन बूथों में 143 संवेदनशील एवं 189 बूथ अति संवेदनशील घोषित किए जा चुके हैं।

इन गांवों में हो चुका है सर्वसम्मति से चुनाव : गांव बरसाना, सोलू माजरा, बुडनपुर सहित कुछ अन्य गांवों में सहमति से सरपंचों का चयन हो चुका है। इन गांवों मेें एक-एक उम्मीदवार ने ही नामांकन पत्र दाखिल किया है।

लोगों ने यह कहा
सरपंचों के लिए शैक्षणिक योग्यता का फैसला सराहनीय है। पढ़े-लिखे लोग पंचायतों में आगे आएंगे। भ्रष्टाचार रोकने में मदद मिलेगी। पढ़े लिखे प्रतिनिधियों के कारण पंचायतों की कार्यप्रणाली में काफी बदलाव आएगा।
सुरेंद्र सिंह, निवर्तमान सरपंच चंदाना

हरियाणा में सरकार द्वारा जनहित के निर्णय लिए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सरकार के निर्णय पर मुहर लगा दी है। प्रदेश में पढ़ी लिखी पंचायतें होंगी जो अच्छा काम कर सकेेंगी। इस फैसले के दूरगामी परिणाम सामने आएंगे।
रविभूषण गर्ग, अध्यक्ष, एनजीओ प्रकोष्ठ भाजपा।

यह ठीक है सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सरकार के हक में दिया है लेकिन सरकार ने जो शर्तें लगाई हैं, वे जनता के हित में नहीं हैं। सरकार को खुद ही अपनी शर्तें वापस ले लेनी चाहिए। इन शर्तों से प्रदेश के अधिकतर लोग चुनाव लड़ने से वंचित रह जाएंगे। हरियाणा में शिक्षा का इतना विस्तार नहीं है।
पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा।

सरकार जनहित के हितों में फैसले ले रही है। पंचायत चुनाव में शैक्षणिक अनिवार्यता से पंचायती कामकाज में पारदर्शिता आएगी। यह सही फैसला है।
राजपाल तंवर, अध्यक्ष, भाजपा कैथल।

यह फैसला उन लोगों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं, जो पढ़ना लिखना तो जानते हैं, लेकिन उनके पास आठवीं, दसवीं का प्रमाणपत्र नहीं है। इससे योग्य व्यक्ति भी चुनाव लड़ने से वंचित रह जाएंगे।
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समाजसेवी रमेश जांगड़ा।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। हरियाणा में सभी पंचायत प्रतिनिधि पढ़े लिखे होंगे तो पंचायती राज संस्थाएं ज्यादा मजबूत होंगी।
राजेश चीका, सदस्य, भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी।

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