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रात को एक डॉक्टर और नर्स के सहारे जिला अस्पताल

Wed, 09 Dec 2015 11:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
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जिला अस्पताल में रात की इमरजेंसी सेवाएं एक डॉक्टर और नर्स के सहारे होती हैं। ऐसे में जाहिर है कि रात को आने वाले इमरजेंसी केसों में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पाती होंगी। इस अस्पताल में डॉक्टरों के कई पद रिक्त पड़े हैं। दूसरी व्यवस्थाएं भी चरमराई हुई हैं। बुधवार सुबह जब डीसी केएम पांडुरंग ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया तो यहां की व्यवस्था देखकर वे हैरान रह गए।
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डीसी ने सभी वार्डों का निरीक्षण किया। आपातकालीन वार्ड में एक डॉक्टर और एक नर्स ड्यूटी पर मिले। इसके बाद डीसी ने एंबुलेंस वार्ड का दरवाजा खटखटाया और एंबुलेंस के बारे में पूछा। मौके पर तैनात कर्मचारी ने बताया कि अस्पताल में 12 एंबुलेंस हैं लेकिन मौके पर केवल नौ थीं, बाकी कहां हैं, इसके बारे में कर्मचारी कुछ भी नहीं बता पाया। डीसी को कर्मचारियों का हाजिरी रजिस्टर भी नहीं मिला।

सामान्य वार्ड में भी हालात खराब मिले। मरीजों ने डीसी से शिकायत की कि रात को अस्पताल की ओर से उन्हें कंबल नहीं दिए जाते। कुछ वार्डों में तीमारदार भी अधिक मिले। वार्डों में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल था। सामान्य वार्ड के स्टाफ में कोई भी सदस्य मौके पर नहीं मिला। शौचालयों की हालत खराब थी। यहां एक वार्ड के केबिन में मरा हुआ चूहा मिला।
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जच्चा-बच्चा वार्ड में लीक हो रहे पाइप के कारण पूरे वार्ड में गंदा पानी फैला हुआ था। यहां भर्ती मरीज के परिजन जोगेंद्र सिंह ने बताया कि पूरी रात से एक भी नर्स या डॉक्टर ने दौरा नहीं किया। डीसी ने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों से ड्यूटी रोस्टर दिखाने को कहा लेकिन वे नहीं दिखा पाए। ड्यूटी रोस्टर के नाम पर हाथ से लिखी हुई हाजिरी दिखाई गई जिसमें त्रुटियां थीं।

ये निर्देश दिए
डीसी ने सीएमओ को निर्देश दिए कि अस्पताल में डॉक्टर, स्टाफ नर्स एवं कर्मचारी अपने पहचान पत्र डाल कर रखें। वे पूरी वर्दी में हों।
आपातकालीन वार्ड में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए। डीसी ने एंबुलेंस सेवाओं में सुधार के निर्देश जारी किए। कहा जिस गाड़ी की रिपेयर होनी है, उसकी समय पर मरम्मत करवाई जाए।

डॉक्टरों के कई पद खाली
जिला अस्पताल में चार साल से डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। 2011 में यह अस्पताल शुरू हुआ था। 42 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। इस समय 28 डॉक्टर हैं। 14 पद अभी भी खाली पड़े हैं।

एंबुलेंस सेवाएं चरमराई
पूरे जिले में 14 एंबुलेंस हैं। इनमें से सात गाड़ियां पूरी तरह से कंडम हो चुकी हैं। जो सात गाड़ियां बची हैं, उनमें से छह गाड़ियां मरीजों लाती और ले जाती हैं। एक गाड़ी रेफर केसों को ले जाने का काम करती है। रात को इन सात में से भी दो गाड़ियां लाइटें खराब होने के कारण खड़ी रहती हैं।

अस्पताल में कई खामियां पाई गईं। इन्हें दूर करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं ताकि मरीजों को परेशानी न हो।
केएम पांडुरंग, डीसी

रात को केवल इमरजेंसी वार्ड में एक डॉक्टर की ड्यूटी होती है। इसके अलावा महिला लेबर रूम में एक डॉक्टर की ड्यूटी होती है। वार्डों में अगर और डॉक्टरों की जरूरत पड़ती है तो उन्हें बुलाया जाता है। आपातकालीन वार्ड में डॉक्टरों की कमी के कारण एक ही डॉक्टर की ड्यूटी लगाई जाती है। इसके अलावा जो भी खामियां हैं, उन्हें दूर किया जाएगा।
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डॉ. देवेंद्र सिंह, डिप्टी सीएमओ एवं कार्यकारी सीएमओ, कैथल।
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