पाई अनाजमंडी में शेडों के नीचे रखा वेयरहाउस का स्टाक। संवाद
कैथल। मौसम के बदले मिजाज और प्रशासनिक रवैये के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र में हुई 25 एमएम की मूसलाधार बारिश से अनाज मंडियों में खुले में पड़ा हजारों मीट्रिक टन धान भीग गया। सरकारी खरीद शुरू न होने से पहले ही 14,798 मीट्रिक टन (एमटी) पीआर धान मंडियों में आ चुका है।
इसके अलावा 12,891 मीट्रिक टन 1509 किस्म का धान मंडियों में पहुंच चुका है। हालांकि 30 प्रतिशत 1509 किस्म की धान का उठान हो चुका है। सोमवार को जैसे ही आसमान में काले बादल छाए और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हुई, मंडियों में किसान तिरपाल और प्लास्टिक की शीटें ढूंढकर फसल को ढंकने का प्रयास करने लगे। हालांकि तेज बारिश के कारण ये प्रयास नाकाफी साबित हुए। कई जगहों पर जलभराव के कारण पानी तिरपाल के नीचे से बोरियों और धान के ढेरों में घुस गया। इससे फसल में नमी बढ़ने और दाना काला पड़ने का खतरा पैदा हो गया है।
खरीद शुरू न होने से पहरा देने को मजबूर किसान : किसान रामदास और सोहन लाल ने आरोप लगाया कि समय पर सरकारी खरीद शुरू न होने के कारण उन्हें अपनी फसल को मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखना पड़ रहा है। फसल चोरी न हो जाए और आवारा पशु उसे नुकसान न पहुंचाएं, इसके लिए किसान रातों को जागकर मंडियों में पहरा दे रहे हैं। अब बारिश ने उनकी इस परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है।
भीगे हुए धान को सुखाने में अब किसानों को कई दिनों का अतिरिक्त समय लगेगा जिससे उनका लागत खर्च और मानसिक तनाव दोनों बढ़ गए हैं। मंडियाें में तौलाई कर बोरियों में रख गया धान भी भीग गया। डर है कि दाने की चमक और गुणवत्ता प्रभावित होने पर मंडियों में उन्हें फसल का उचित भाव मिलने में परेशानी हो सकती है।
पाई अनाजमंडी में शेडों के नीचे रखा वेयरहाउस का स्टाक। संवाद
पाई अनाजमंडी में शेडों के नीचे रखा वेयरहाउस का स्टाक। संवाद
पाई अनाजमंडी में शेडों के नीचे रखा वेयरहाउस का स्टाक। संवाद
पाई अनाजमंडी में शेडों के नीचे रखा वेयरहाउस का स्टाक। संवाद