संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की मंडियों में धान खरीद, मिलों को आवंटन और गेटपास काटने में बड़े फर्जीवाड़े की आशंका गहराती जा रही है। आरोप है कि मंडियों में धान आया ही नहीं, लेकिन फर्जी गेटपास काटकर करोड़ों रुपये का घोटाला कर दिया गया। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त के निर्देश पर जांच के लिए विशेष टीमें गठित कर दी हैं। भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने आरोप लगाते हुए कहा कि कैथल, ढांड और चीका मंडियों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी की गई है।
मंडियों में अनुमान से अधिक धान की आवक भी गड़बड़ी की ओर इशारा कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, गत वर्ष की तुलना में इस बार एक लाख मीट्रिक टन से अधिक पीआर धान की आवक दर्ज की गई है, जबकि कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष का रकबा गत वर्ष से कम रहा। इससे यह आशंका और प्रबल हो गई है कि धान दूसरे राज्यों से लाकर या बिना धान आए फर्जी पर्चों के माध्यम से खरीद दर्शाई गई है।
फर्जी गेटपास से किया गया घोटाला : भाकियू प्रदेशाध्यक्ष ः भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने आरोप लगाया कि मंडियों में करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया है, लेकिन सरकार मौन साधे बैठी है। उन्होंने कहा कि कैथल, ढांड और चीका मंडियों में बिना धान आए फर्जी गेटपास काटे गए हैं, जिससे सरकारी खजाने को भारी चपत लगी है।
स्थानीय किसानों से धान को कम दाम पर खरीद कर सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचने का खेल खेला गया। इससे न केवल किसानों के हितों पर चोट पहुंची, बल्कि सरकारी राजस्व को भी नुकसान हुआ। रतन मान ने कहा कि जब तक सरकारी खरीद एजेंसियों, आढ़तियों, मंडी सचिवों और राइस मिलरों की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक इस घोटाले का सच सामने नहीं आएगा।
890478 मीट्रिक टन की आवक, 140666 गेटपास जारी
जिले की विभिन्न मंडियों में सोमवार शाम करीब साढ़े तीन बजे तक 8,90,478 मीट्रिक टन पीआर धान की आवक दर्ज की गई। इसमें से सरकारी खरीद एजेंसियों ने 8,86,289 मीट्रिक टन धान खरीदा है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 1,40,666 गेटपास काटे जा चुके हैं।
सीजन की शुरुआत से ही खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं - किसानों की फसल को कम रेट पर खरीदकर उन्हें कच्ची पर्ची दी गई, और बाद में सरकारी दर के अंतर की राशि वापस मांगी गई।
खरीद प्रक्रिया की हर एंगल से जांच की जा रही है। प्राथमिक जांच में फिलहाल यह बात सामने आई है कि इस बार पीआर धान का रकबा पिछले साल से थोड़ा अधिक रहा, लेकिन कुछ आंकड़ों में विसंगतियां मिली हैं। निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा। -अजय सिंह, एसडीएम