संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले ने इस बार पराली प्रबंधन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। म्हारे किसानों की बढ़ती जागरूकता और बेहतर तालमेल का असर रहा कि अबकी पराली जलाने की महज 10 एफआईआर दर्ज कराई गई है। इससे साफ हो जाता है कि म्हारे किसानों ने पराली प्रबंधन सीख लिया है।
सरकार की योजनाओं और विभाग की जागरूकता मुहिम का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि जहां पिछली बार पराली जलाने की 194 लोकेशन दर्ज हुई थीं, वहीं इस बार यह संख्या घटकर केवल 60 रह गई। इनमें भी 50 लोकेशन फर्जी पाई गईं। महज 10 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई।
सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक की टीम तथा पटवारियों ने गांव-गांव जाकर किसानों को पराली न जलाने और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया। विभाग के अनुसार, पराली प्रबंधन की सरकारी योजना से जुड़े किसान अब अच्छा लाभ कमा रहे हैं।
खाते में आएंगे 1200 रुपये प्रति एकड़ ः सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन योजना के अंतर्गत किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता 1000 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति एकड़ कर दी है। इस बार कैथल जिले के 34 हजार किसानों के खातों में कुल 34 करोड़ रुपये की राशि पहुंचाई जाएगी। पिछली बार यह लाभ केवल 30 हजार किसानों को मिला था, जबकि 141 किसानों पर केस दर्ज हुए थे।
सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने बताया कि इस बार किसानों ने पराली प्रबंधन को गंभीरता से अपनाया है। पिछली बार 141 के मुकाबले केवल 10 एफआईआर दर्ज हुई हैं। बेहतर तालमेल के चलते पराली प्रबंधन में यह रिकॉर्ड उपलब्धि हासिल हुई है।
10 लाख एमटी पराली का किया गया प्रबंधन
जिले में इस साल 4 लाख 65 हजार एकड़ में धान की खेती की गई थी, जिसमें से 10 लाख मीट्रिक टन पराली का वैज्ञानिक प्रबंधन किया गया। विभाग ने किसानों को सब्सिडी पर अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध करवाईं और नियमित निरीक्षण किया।