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एक राष्ट्र-एक चुनाव है क्रांतिकारी कदम : छाबड़ा

Wed, 26 Mar 2025 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। एक राष्ट्र एक चुनाव विषय पर कलायत के श्री कपिल मुनि महिला कॉलेज में सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें इसके फायदा गिनाते हुए कहा कि इससे चुनाव खर्च में कमी आएगी।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर एक राष्ट्र एक चुनाव अभियान के प्रदेश सह संयोजक डा.मदन मोहन छाबड़ा व कुरुक्षेत्र विभाग सह संयोजक अजीत चहल मौजूद रहे। छात्राओं को संबोधित करते डा.छाबड़ा ने कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव एक क्रांतिकारी कदम है जो भारत के लोकतंत्र को और अधिक मजबूत, पारदर्शी और कुशल बना सकता है।
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उन्होंने कहा कि इस कदम से न केवल सरकार के काम में निरंतरता आएगी, बल्कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता भी मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार चुनाव ड्यूटी से मुक्ति मिलेगी। बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण विकास परियोजनाएं अधर में रह जाती हैं। एक साथ चुनाव कराने से यह बाधा दूर होगी और सरकारें अपने विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगी।

उन्होंने कहा कि इससे मतदाताओं में अधिक जागरूकता और उत्साह पैदा होगा। जिससे मतदान प्रतिशत बढ़ेगा और लोकतंत्र मजबूत होगा। चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों को बार-बार प्रचार के लिए भारी मात्रा में धन खर्च करना पड़ता है। एक साथ चुनाव होने से चुनाव खर्च कम होगा जिससे धन का अधिक कुशल उपयोग होगा।

डा.छाबड़ा ने कहा कि आज देश का सकल घरेलू उत्पाद 6.8 पर बंद हो रहा है। यह किसी देश की अर्थव्यवस्था के आकार व स्वास्थ्य को मापने का एक तरीका है। देश की जीडीपी में जो सुधार आ रहा है उसका मतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। बार बार चुनावों पर खर्च होने वाला पैसा यदि देश की अर्थव्यवस्था में सुधार पर खर्च किया जाए तो निश्चित तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में एक नंबर पर आ सकती है। छाबडा ने कहा कि चुनाव के दौरान अक्सर जांच एजेंसियों द्वारा कालेधन के उपयोग को लेकर आरोप लगते हैं। ऐसे में एक देश-एक चुनाव होने पर इस तरह की घटनाओं पर रोक लगेगी।

वर्ष 1967 तक एक साथ होते थे चुनाव

छाबड़ा ने कहा कि वर्ष 1951-52 से वर्ष 1967 तक लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के निर्वाचन अधिकांशत: साथ-साथ कराए गए थे और इसके पश्चात् यह चक्र टूट गया।

चुनाव के समय देशभर में फोर्स से लेकर विभिन्न सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। इससे उनके सरकारी काम में भी व्यवधान होता है। ऐसे में एक देश एक चुनाव के लिए व्यापक तौर पर जनमत बनाने की आवश्यकता है ताकि इस विषय से संबंधित तो भ्रांतियां हैं उन्हें चर्चा के माध्यम से दूर किया जा सके।
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कार्यक्रम में उप प्राचार्य डा.रुपेंद्र, डा.सुनील गर्ग ने अतिथियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम के पश्चात कालेज की छात्राओं ने डा.मदन मोहन छाबड़ा को प्राध्यापक डा.सुनील गर्ग की स्थायी नियुक्ति को लेकर मांगपत्र भी सौंपा।
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