कैथल। समग्र शिक्षा पंचकूला की ओर से जिला स्तर पर अधिकारियों को दिव्यांग विद्यार्थियों को पढ़ाने के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह एक दिवसीय समावेशी शिक्षा उन्मुखीकरण जिला स्तरीय कार्यक्रम होगा। इसमें बीईओ से लेकर बीआरसी व प्रधानाचार्य शामिल होंगे। इस प्रशिक्षण शिविर में चिकित्सक और उच्चतर शिक्षा विभाग के प्राध्यापक जानकारी देंगे। समग्र शिक्षा अभियान कार्यालय की जिला परियोजना अधिकारी सरोज कुमारी ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी 18 दिसंबर को जाखौली अड्डा के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण में कुल 85 प्रतिभागी भाग लेंगे, प्रशिक्षण का समय सुबह साढ़े नौ से पांच बजे तक का रहेगा। प्रशिक्षण देने के लिए करनाल और कैथल के विषय विशेषज्ञ डॉक्टर व कॉलेज के प्रोफेसर को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग किसी से कम नहीं हैं और वे भी बुलंदियां छू सकते हैं। हमारे समाज में ऐसे बहुत से उदाहरण प्रस्तुत हैं जिनमें दिव्यांगों ने बहुत कुछ करके दिखाया है। केवल उनके प्रोत्साहन की आवश्यकता है। समाज को कभी भी दिव्यांगजन को उसकी किसी भी प्रकार की कमी का एहसास नहीं करवाना चाहिए। हमेशा उसकी ओर से किए गए छोटे-छोटे कार्यों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए, ताकि छोटे-छोटे कामों में पारंगत होकर वह बड़ी-बड़ी उपलब्धियां छू सकें।
अधिकारी ने कहा कि इस प्रशिक्षण में जो बातें प्रतिभागियों को सिखाई जाएंगी, इसका सीधा लाभ दिव्यांग बच्चों को मिलेगा। सभी समावेशी केंद्र के प्रधानाचार्य को पत्र लिख दिया गया है जिससे वह अपने-अपने खंड प्रतिभागियों की लिस्ट बनाकर भेजेंगे। सहायक परियोजना संयोजक कुशल कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण के मुख्य चार विषय रहेंगे। इनमें दिव्यांगता और समावेशी शिक्षा ,ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार, विशिष्ट शिक्षण विकार व दिव्यांग छात्रों की शिक्षा के प्रति समुदाय की भूमिका मुख्य रहेंगे। उन्होंने बताया कि 21 प्रकार की दिव्यांगता होती है। 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में दिव्यांगों की जनसंख्या का 2.13 प्रतिशत हिस्सा है जिसमें 75 प्रतिशत दिव्यांगजन गांव में रहते हैं। उन्होंने बताया कि जिले के राजकीय विद्यालयों में 982 दिव्यांग विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।