संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। विजया एकादशी पर सोमवार को कई श्रद्धालुओं ने व्रत रखा। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। कई श्रद्धालुओं ने निर्जला व्रत रखकर दिनभर भगवान विष्णु की आराधना की। महंत अवध बिहारी ने इस व्रत की महता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विजया एकादशी व्रत से सभी पापों का नाश होता है।
भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है जिससे जीवन में सुख और शांति आती है। इस दिन व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और आत्मा पवित्र होती है। दान-पुण्य करने से पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। यह दिन संयम और आत्मनियंत्रण का प्रतीक है । जो व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। सच्चे दिल से की गई प्रार्थना सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती है। महंत ने कहा कि इस व्रत का पालन करने वाले को जीवन में सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है। सत्संग और कीर्तन से भगवान का सान्निध्य प्राप्त होता है। इस दिन की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है।
एकादशी पर किया हवन
कलायत। विजया एकादशी पर ग्यारह रुद्री मंदिर में हवन और भंडारे का आयोजन किया गया। मुख्य यजमान सुरेश निर्मल और मंदिर कीर्तन मंडली ने यज्ञ में आहुतियां डाल कर सर्व मंगल की कामना की। पंडित लोकेश शर्मा ने बताया कि एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। भगवान विष्णु का किसी भी रूप में पूजन मानव मात्र की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करता है।
भगवान राम हालांकि विष्णु के अवतार थे उसके बावजूद भी प्राणियों को सद्मार्ग दिखाने के लिए उन्होंने इस व्रत को किया। यह व्रत भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले रखा था और उन्हें विजय मिली थी। संवाद