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‘हे गिरधारी कलयुग में फिर तुमको आना होगा’

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32-पूंडरी। फल्गु उत्सव में अतिथियों को सम्मानित करते दिनेश शर्मा। - फोटो : Kaithal
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पूंडरी। फल्गु तीर्थ पर हरियाणा साहित्य अकादमी, कला परिषद अंबाला मंडल व फल्गु मंदिर सुधार समिति के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को राष्ट्रीय कवि सम्मेलन और हरियाणवी रागिनी कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें वर्तमान की विकट परिस्थितियों में कवि दिनेश शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण से अवतार लेने का अनुरोध करते हुए सुनाया- ‘धर्म स्थापना करने को अब, कदम बढ़ाना होगा, हे गिरधारी कलयुग में फिर तुमको आना होगा।’ इस पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं।
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कार्यक्रम में कवियों ने अपनी प्रस्तुति से सभी श्रोताओं का मन मोह लिया। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि सुभाष गर्ग अध्यक्ष प्रो. अमृतलाल मदान, डॉ. भास्करानंद बिडालिया तथा डॉ विजेंद्र ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद अतिथियों, कवियों और कलाकारों का स्वागत आयोजन समिति की ओर से अंगवस्त्र से किया। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों के प्रसिद्ध कवियों ने कविता पाठ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। कवि सम्मेलन की शुरूआत दिल्ली से आए युवा कवि पंकज वर्मा ने किसान को पूज्य बताते हुए सुनाया- ‘जी कर अभाव का जीवन भी वो अपना फर्ज निभाता है। वो पूज्य जीव ,वो धरती पुत्र, वो अन्नदाता कहलाता है।’ डॉ. तेजिंद्र की कविता- ‘क्षणिका नर्स से शादी कर पछताना पड़ा, जीवन भर सिस्टर कहकर बुलाना पड़ा’ पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं।
ईश्वर चंद गर्ग ने सकारात्मक सोच पर अपनी गजल पढ़ते हुए कहा- ‘क्या शिकायत है कि कुछ कमतर मिला, क्यों नहीं कहते कि सब बेहतर मिला।’ कमलेश शर्मा ने बेटियों पर अपनी कविता में कहा- ‘तिरस्कार की अग्नि से झुलसे मां बाप को, बेटियां ही लगती हैं, कृतज्ञता भरी नम आंखों से चंदन का लेप’ से दर्शकों को भावुक कर दिया। हास्य कवि विनीत पांडेय ने सुनाया- ‘फूल बनकर महक जाना जिंदगी है, गीत सुख के गुनगुनाना जिंदगी है। गम के बादल आएंगे और जाएंगे, गम भुला कर मुस्कुराना जिंदगी है।’ गीतकार चरणजीत चरण ने अपने गीतों और मुक्तकों से दर्शकों को बहुत प्रभावित किया। उन्होंने मां के लिए सुनाया- ‘जिंदगी में और तो वसीला कुछ भी नहीं था मां ने दी दुआएं तो हम कामयाब हो गए।’
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कवि डॉ. कमलेश शर्मा ने अपनी कविता- ‘धरती और अनंत व्योम में, राम रमे हैं रोम रोम में, चंद सिरफिरों को समझाने, क्या हम अपने प्राण दें, राम हुए हैं कितने और प्रमाण दें’ पर खूब तालियां बटोरी। कवि सम्मेलन के बाद रागिनी कार्यक्रम शुरू हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत लोक कलाकार सुरेश भाणा ने की। सुरेश भाणा ने हरियाणवी संस्कृति और लोक जीवन पर कई रागिनियों की प्रस्तुति दी और दर्शकों की खूब तालियां बटोरी। समापन पर मुख्य अतिथि सुभाष गर्ग ने फल्गु लोककला उत्सव का हरियाणवी संस्कृति से ओतप्रोत आयोजन के लिए हरियाणा साहित्य अकादमी और हरियाणा कला परिषद अंबाला मंडल को धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. अमृतलाल मदान ने सुंदर प्रस्तुति के लिए सभी कवियों और कलाकारों को सराहा। अध्यक्ष मंडल में शामिल डॉ. भास्करानंद बिडालिया ने इस अवसर पर कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए इस प्रकार के आयोजन को वर्तमान की आवश्यकता बताया। हरियाणा साहित्य अकादमी से डॉ विजेंद्र ने सभी आमंत्रित अतिथियों और कवियों का धन्यवाद किया और हरियाणा कला परिषद प्रतिनिधि अश्विनी कुमार ने लोक गायकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोगों में संजय ,रूपचंद, विकास शर्मा, सतीश सरोहा, प्रवीण सिंह, हर्ष व कपिल उपस्थित रहे।
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