माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। सड़क पर दो कदम चलने वाले यात्रियों का सबसे बड़ा सहारा बना ऑटो अब खुद ही संकट में नजर आ रहा हैं। शहर में ई-बसों के विस्तार, पुलिस की लगातार कार्रवाई और आर्थिक दबाव के चलते ऑटो की संख्या आधे से भी कम रह गई है। कई ऑटो चालकों की गाड़ियां कागज पूरे न होने पर इंपाउंड कर दी गईं, तो कई की किस्त न भर पाने पर बैंक ने वाहन जब्त कर लिए। बढ़ते खर्च और घटती कमाई के कारण कई चालकों ने खुद ही ऑटो चलाना बंद कर दिया है।
शहर में कभी करीब आठ हजार ऑटो सड़कों पर दौड़ते थे, जो हर प्रमुख मार्ग पर कतारों में नजर आते थे। जीटी रोड, असंध रोड और गोहाना रोड पर ऑटो का दबदबा था। यात्रियों को आसानी से सवारी मिल जाती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट में बुधवार को असंध रोड, गोहाना रोड और जीटी रोड पर ऑटो की संख्या पहले की तुलना में आधे से भी कम पाई गई। कई जगहों पर ई-रिक्शा और ई-बसों ने इनकी जगह ले ली है।
असंध रोड स्थित नहर नाके पर जहां कभी ऑटो की लंबी कतारें लगती थीं, अब वहां ई-बसों का संचालन बढ़ने से ऑटो की आवाजाही कम हो गई है। ऑटो यूनियन का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई और ई-बस व्यवस्था के कारण ऑटो चालकों का रोजगार प्रभावित हुआ है।
ऑटो यूनियन के प्रधान नरेश का कहना है कि पुलिस ने कई ऑटो और ई-रिक्शा को चालान कर इंपाउंड किया है, जिससे चालक आर्थिक संकट में आ गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ई-बसों को बढ़ावा देने के लिए ऑटो चालकों पर सख्ती की जा रही है, जिसका असर न सिर्फ चालकों बल्कि स्पेयर पार्ट्स कारोबार पर भी पड़ा है।
प्रशासन ने यातायात व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण के लिए ऑड-ईवन नियम लागू करने के साथ ऑटो के लिए नंबर कोड भी जारी किए थे, लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। नियमों की अनदेखी के चलते यह योजना प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाई।
ऑटो चालकों को नियमों का पालन के लिए कई बार जागरूक किया गया, लेकिन इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं हुआ। यातायात पुलिस ने नियमों की अनदेखी करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की है और आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
-सुरेश कुमार सैनी, डीएसपी यातायात
प्रशासन और पुलिस द्वारा ई-बसों को बढ़ावा देने के नाम पर ऑटो और ई-रिक्शा को लगातार इंपाउंड और चालान किया जा रहा है। इससे चालक आर्थिक संकट में आ गए हैं और उनका रोजगार प्रभावित हुआ है।
-नरेश डाहर, प्रधान, ऑटो यूनियन पानीपत