श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में अब दोपहर बारह से दो बजे तक खाना दिया जाएगा। इस दौरान मंदिर में जो भी पहुंचेगा, उसके लिए भोजन तैयार रहेगा। मंदिर की प्रबंधक समिति सदस्यों ने मंदिर में आने वाले चढ़ावे से अलग अपने खुद के योगदान से यह सेवा शुरू की है। मौनी अमावस्या के अवसर पर शनिवार को लंगर शुरू किया।
लंगर का शुभारंभ मंदिर सभा के अध्यक्ष विनोद मित्तल ने किया। मित्तल ने कहा कि मंदिर में इस पहल के तहत हर रोज दोपहर बारह बजे से दो बजे तक भोजन दिया जाएगा। जो भी व्यक्ति इस दौरान पहुंचेगा, चाहे वह कोई भी हो, अमीर, गरीब या कोई अन्य, उसे यहां भोजन दिया जाएगा। हर रोज भोजन तैयार मिलेगा। सामान्य भोजन की व्यवस्था इस प्रकल्प में है।
उन्होंने बताया कि कोरोना काल से पहले यह शुरू किया था। बीच में डीसी के आदेश के बाद इसे बंद कर दिया था। अब फिर से सभी सदस्यों ने आपसी सहमति से यह सेवा शुरू की है। इस सेवा के लिए मंदिर में आने वाले चढ़ावे से कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। मंदिर सभा के 47 सदस्यों ने खुद के योगदान से इसका खर्च चलाने का फैसला लिया है।
सभी सदस्यों ने अपने सामर्थ्य अनुसार इसमें राशि दी है। उन्होंने शहर के लोगों से अपील की कि अन्नदान की इस योजना में बढ़-चढ़कर सहयोग करें। इस अवसर पर बहादुर सैनी, तुलसीदास सचदेवा, महेंद्र सरदाना, रमेश गर्ग, रमेश गुप्ता, घनश्याम, महासचिव रविप्रकाश गुप्ता, मेहरचंद सिंगला, महेंद्रपाल शर्मा, सतपाल गुप्ता सहित भारी संख्या में सदस्य मौजूद थे।
मंदिर का ऐतिहासिक एवं प्राचीन महत्व
देश में काशी के बाद कैथल में ही भगवान शिव के ग्यारह रुद्र स्थापित हैं। इसी कारण इस मंदिर को श्री ग्यारह रुद्री मंदिर कहा जाता है। मंदिर की ऐतिहासिक एवं पौराणिक मान्यता है। कई प्राचीन पुस्तकों में इस मंदिर का जिक्र मिलता है। बताया जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के महाभारत युद्ध के बाद मानसिक शांति की पूजा के लिए इन ग्यारह रुद्रों की स्थापना की थी। तभी से इनका पूजन होता है।