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कहीं स्वीकृत पदों पर नहीं हैं पूरे डॉक्टर तो किसी अस्पताल में नर्स और लैब तकनीशियन की खल रही कमी

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कैथल। जिले के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दो-दो दर्जन से ज्यादा गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं देने का जिम्मा है लेकिन 14 लाख से ज्यादा आबादी वाले कैथल जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ पूरा नहीं है। कहीं स्वीकृत पदों पर डॉक्टर पूरे नहीं हैं तो किसी अस्पताल में नर्स और लैब तकनीशियन की कमी चल रही है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले के अस्पतालों में डॉक्टरों के 143 स्वीकृत पद हैं। इनमें से केवल 65 पदों पर ही डॉक्टर तैनात हैं, 78 पद खाली पड़े हैं। आठ स्वीकृत पदों में से पांच पर डिप्टी सिविल सर्जन नहीं हैं। अगर स्टाफ नर्सों की बात करें तो 193 में से 114 पदों पर स्टाफ नर्स नहीं हैं। डेंटल सर्जन के भी विभिन्न अस्पतालों में 30 में से 16 पद खाली पड़े हैं। 56 में से 28 पदों पर एलटी हैं लेकिन आधे पद खाली पड़े हैं। रेडियोग्राफर किसी अस्पताल में हैं ही नहीं। अन्य पदों पर भी कर्मचारी पूरे नहीं हैं।
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कई बार छोटी से छोटी बीमारी की जांच के लिए भी मरीजों को प्राथमिक केंद्र के चक्कर लगाने पड़ते हैं। वहां इलाज न मिलने पर सामुदायिक केंद्र या फिर कैथल नागरिक अस्पताल में जाना पड़ता है। अगर जिला नागरिक अस्पताल में जाते हैं तो वहां भी लंबी-लंबी कतारों में लगकर स्वास्थ्य सुविधाएं लेनी पड़ती हैं। ऐसे में कई बार तो मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में एक-एक डॉक्टर पर जिले के 20 से 21 हजार से ज्यादा नागरिकों के स्वास्थ्य का जिम्मा है। कई बार अगर किसी अस्पताल में डॉक्टर छुट्टी पर रह जाए या किसी कारणवश अस्पताल में न आ पाए तो लोगों की समस्या और बढ़ जाती है। लोगों को तुरंत या तो शहरों की तरफ भागना पड़ता है या फिर निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। जिला अस्पताल में कुल 55 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं मगर यहां केवल 23 डॉक्टर तैनात हैं। 32 पद खाली हैं। 90 में से 45 पदों पर नर्से कार्यरत हैं। आधी सीटें खाली हैं। वहीं 14 में से एलटी के सात पद खाली हैं।
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