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पराली जलाने को ना... और जिले की आबोहवा हुई शुद्ध

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56-कैथल। किसान से पराली की जानकारी लेते हुए अधिकारी कर्मचंद। - फोटो : Kaithal
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कैथल। पिछले साल धान के सीजन में जिले में पराली जलाने के 1157 मामले सामने आए थे। इस बार जिले के ज्यादातर किसानों ने पराली जलाने को एक तरह से न कर दी है। किसान पराली जलाने की बजाय इससे आय अर्जित कर रहे हैं। इस साल अभी तक जिले में मात्र सात स्थानों पर ही आगजनी की बात सामने आई है। इस साल इन दिनों जिले का एक्यूआई इस समय 23 के आसपास है। जबकि पिछले साल से यह 123 था। जबकि 100 से अधिक का एक्यूआई खतरनाक श्रेणी में आ जाता है।
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कैथल जिले में लगभग दो लाख 75 हजार एकड़ में धान के पीआर ग्रुप का उत्पादन होता है। जिसमें पराली के बचने पर अक्सर इसे जलाने की घटनाएं सामने आती थीं। इस कारण हर साल दीवाली के दिनों में क्षेत्र में धुंध छा जाती थी। पूरे जिले में धुएं के कारण सांस लेना मुश्किल हो जाता था। कुछ अपवादों को छोड़कर इस बार अभी तक किसानों ने पराली को जलाने से पूरी तरह परहेज किया है। पिछले साल पूरे सीजन में 1157 जगह पराली में आग लगाने की घटनाएं सामने आई थीं। पूरे प्रदेश में कैथल जिला पराली में आग लगने के मामले में दूसरे स्थान पर था। पहले स्थान पर फतेहाबाद जिला था। इस बार अभी तक कैथल में केवल सात स्थानों पर आगजनी की बात सामने आई है। जिसमें विभाग ने किसानों पर 17500 रुपये जुर्माना किया है।
एक्यूआई में अभी तक दिख रहा है काफी सुधार
जिले में पराली न जलने के कारण एक्यूआई में भी जबरदस्त सुधार है। कृषि उपनिदेशक कार्यालय के अनुसार पिछले साल 11 अक्तूबर को जिले का एक्यूआई 123 था। जो इस साल इसी दिन एक्यूआई महज 23 है। हालांकि इसका कारण इस सप्ताह हुई बारिश भी है। लेकिन पराली कम जलना भी एक्यूआई में सुधार होने का बड़ा कारण माना जा रहा है।
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नौ हजार 575 मशीनों से किया जा रहा है पराली प्रबंधन
पूरे जिले में इस समय नौ 575 मशीनों से पराली प्रबंधन किया जा रहा है। इसमें से 208 बेलर मशीनें हैं। जो पराली की गांठें बनाकर पराली प्रबंधन में मदद करती हैं।
28 करोड़ रुपये स्वीकृत, मिला 25 करोड़
डीडीए डॉ. कर्मचंद ने कहा कि कैथल के किसानों ने सूझबूझ कर परिचय देते हुए इस बार पराली नहीं जलाई। पूरे जिले में अभी तक सात मामले ही पराली जलाने के सामने आए हैं। पराली प्रबंधन पर पिछले साल छह करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च कर किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये की राशि दी गई। इस बार खेत में ही पराली का प्रबंधन कर मिट्टी में मिलाने या उसे बाहर निकाल कर फैक्टरियों या अन्य जगह बेचने पर एक हजार रुपये प्रति एकड़ की राशि दी जाएगी। इसके लिए विभाग ने 28 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। जिसमें से 25 करोड़ रुपये की राशि जिले में आ चुकी है। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे इसी प्रकार से पराली प्रबंधन करें। आग से किनारा करें। पूरे प्रदेश में पराली न जलाने के मामले में जिले का छट्ठा स्थान है। धान उत्पादक जिलों में एक तरह से यह नंबर वन है।
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