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Kaithal News: लैब में टेस्ट सुविधा नहीं, दवा को भी तरसे लोग

Tue, 04 Jul 2023 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं चरमरा गई हैं। अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा हैं, क्योंकि यहां पर न तो लैब में पूरी सुविधाएं हैं और दवाओं की भी काफी कमी है।
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अमर उजाला टीम ने सोमवार को अस्पताल परिसर में पहुंचकर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की पड़ताल की। इस पड़ताल में पाया कि यहां पहुंचे मरीजों को अपना इलाज करवाने के लिए घंटों भर तक का इंतजार करना पड़ता है।

लैब हो या दवाओं का काउंटर, या फिर ओपीडी और गर्भवती महिलाओं का वार्ड। हर जगह पर मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। यहां पर थायराइड की मशीन के खराब होने के बाद थायराइड का टेस्ट भी बंद हो चुका है।
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इस समय अस्पताल में आंखों का लुब्रिकेंट, ओमप्राजॉल और खांसी का सिरप नहीं है। इन दवाओं को मरीजों को रुपये खर्च कर बाहर से लाना पड़ता है। गौरतलब है कि इस समय अस्पताल की तरफ से अपने स्तर पर खरीदी गई डेढ़ करोड़ में से महज 50 लाख रुपये का भुगतान हो पाया है। अभी एक करोड़ रुपये का भुगतान होना बाकी है।

सुबह 11 बजे जब टीम अस्पताल में पहुंची तो मुख्य गेट पर बने ओपीडी पंजीकरण के बाहर मरीजों व उनके तीमारदारों की पर्ची कटवाने के लिए काफी भीड़ जुटी थी। यहां पर काफी लंबी लाइन ली थी। गर्मी में पसीने तरबतर लोगों को इंतजार था कि उनकी पर्ची कटे और वे ओपीडी में डॉक्टर के पास इलाज करवाने पहुंचे।

सामान्य अस्पताल में अव्यवस्थाओं पर आप के शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष मास्टर सतबीर गोयत ने कहा कि जिला नागरिक अस्पताल में दवाई कंपनियों के एक करोड़ उधारी के चलते दवाइयों की बहुत कमी बनी है। इसी के साथ एक्सरे, एमआरआई मशीनों में रोजाना काम आने वाली सामग्री खत्म है, लेकिन सरकार की ओर से पूर्ति नहीं की जा रही।
परेशानी, मरीजों की जुबानी
यहां पर पहुंचे बुजुर्ग कूड़ा राम ने बताया कि वह अपने पेट की बीमारी को एक टेस्ट करवाने के लिए पहुंचा था। यहां पर टेस्ट करने वाली मशीन खराब है। इस कारण उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी है।

रीना देवी ने बताया कि वह थायराड का टेस्ट करवाने के लिए पहुंची थी, लेकिन यहां मौजूद कर्मियों ने उसने यह टेस्ट करने से मना कर दिया। उसका टेस्ट नहीं हो पाया है।

रामकली ने बताया कि उसने कुछ दिन पहले ही अपनी आंखों का ऑपरेशन करवाया है। इस ऑपरेशन के बाद उसकी अस्पताल से ही दवा चल रही है, लेकिन दवा नहीं मिली है। उसे बाहर से दवा लेनी पड़ी।

गायिनी वार्ड में पहुंची गर्भवती सुनीता ने बताया कि वह सोमवार को सुबह नौ बजे अपनी जांच करवाने के लिए पहुंची थी। काफी अधिक भीड़ थी। यहां पर एक ही विशेषज्ञ ड्यूटी पर थी। इस कारण उसकी जांच में ही एक से डेढ़ घंटा लग गया।
बताते हैं आंकड़े ः होती है 1200 से अधिक ओपीडी
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के तहत जिला नागरिक अस्पताल में 1200 से अधिक ओपीडी होती है। जबकि गायिनी वार्ड में प्रतिदिन 200 से अधिक की ओपीडी होती है। इसके साथ ही करीब 20 से 25 ऑपरेशन गर्भवती महिलाओं के होते हैं। वहीं, प्रतिदिन करीब 300 मरीजों के विभिन्न प्रकार की लैब में टेस्ट किए जाते हैं। इस दौरान यदि ऑपरेशन का समय होता है तो गायिनी वार्ड में महज एक ही चिकित्सक को सभी व्यवस्था संभालनी पड़ती है। इस कारण डॉक्टरों को भी समस्या है।
अस्पताल अधिकतर टेस्ट हो रहे हैं। केवल थायराइड का टेस्ट नहीं हुआ है। दवाओं की कमी की समस्या पूरे प्रदेश में हैं। ये दवाएं मुख्यालय स्तर पर ही जारी होंगी।
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- डॉ. सचिन मांडले, जिला प्रधान चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल
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