बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की समीक्षा मीटिंग में मिली खामियों पर लगभग एक माह बाद भी ध्यान नहीं दिया जा सका है। यह खुलासा वीरवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत पंचकूला से आई टीम द्वारा ली गई रिव्यू मीटिंग में हुआ।
अभियान की टीम द्वारा जुटाए गए तथ्यों को अधिकारियों के सामने रखा गया जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य एवं महिला एवं बाल विकास परियोजना की जमीनी स्तर पर खामियों को सुधारने का निर्देश दिया गया। इससे पहले 22 अक्तूबर को भी मीटिंग में खामियों की जानकारी दी गई थी। खामियों पर हुई प्रगति को देखने के लिए ही रिव्यू मीटिंग का आयोजन किया गया था।
कन्या प्राथमिक पाठशाला में दो माह से मिड-डे मील नहीं
पिछली बैठक में जांच टीम को गांव मटौर के कन्या हाईस्कूल में करीब एक माह से मिड-डे मील न बनने की खामी मिली थी। जिस पर इस माह भी कोई काम नहीं हुआ। इस तरह से यहां दो माह से मिड-डे मील नहीं मिल रहा है। स्कूल में डिस्पोजल पिट भी नहीं हैं और न ही महिला टीचर। साथ ही पानी के स्टोरेज टैंक भी साफ नहीं हैं।
इसी प्रकार कन्या हाईस्कूल देवबन में लड़कियों के लिए बनाए गए शौचालय काफी दयनीय हालत में हैं। इनमें पानी की सुविधा नहीं हैं। पीने का पानी भी नहीं है। अध्यापकों के लिए मिड-डे मील वर्कर नहर से पानी ढोती हैं। यहां लड़कियों के स्कूल छोड़ने की भी कोई रिपोर्ट नहीं है। इस स्कूल में बालिका मंच एक्टिव मिला। इसी प्रकार से कन्या स्कूल हरसौला में पीने का पानी साफ नहीं है। प्यौदा स्कूल में शौचालय एवं पानी तो ठीक मिले लेकिन स्कूल छोड़ गई लड़कियों की कोई रिपोर्ट नहीं मिली।
आंगनबाड़ी
आंगनबाड़ी मटौर 11 में बच्चों के वजन की रिपोर्टिंग सही नहीं पाई गई। एक ही दिन में दो बार एंट्री मिली। साथ ही वजन रजिस्टर एवं स्टॉक रजिस्टर में ओवर राइटिंग की गई। इसी प्रकार से आंगनबाड़ी नंबर 6 में भी रिकॉर्ड ठीक नहीं पाया गया। इसी तरह आंगनबाड़ी नंबर-4 में भी बच्चों के वजन संबंधी रिकॉर्ड सही नहीं पाया गया। साथ ही यहां खाना बनाने के लिए चूल्हे का प्रयोग करते हुए पाया गया। आंगनबाड़ी नंबर-13 में तो छह माह से रिकॉर्ड ही मेनटेंन नहीं मिला। यहां बच्चों का विकास चार्ट 2011 से नहीं बनाया जा रहा। न ही 2013 से विटामिन की खुराक का कोई रिकॉर्ड मिला। पट्टी अफगान आंगनबाड़ी में पिछली मीटिंग की तुलना में सुधार मिला।
स्वास्थ्य विभाग
स्वास्थ्य विभाग के मटौर के स्वास्थ्य केंद्र में बिना प्रयोग किए हुए शौचालय, बीपी मापने के उपकरण टूटे हुए मिले। यहां थर्मामीटर भी खराब मिला। वहीं हीमोग्लोबिन मीटर भी बिना प्रयोग किया हुआ पाया गया। जबकि प्रयोग के बाद सूइयों को तोड़ा नहीं गया। इसी प्रकार से रामगढ़ स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम के देरी से आने, पानी की कमी, बंद पड़े शौचालयों सहित अन्य खामियां मिलीं। अर्बन पीएचसी में हालत ठीक पाई गई।
एंबुलेंस की कमी में दम तोड़ रहे बच्चे
बैठक में प्रसव के दौरान शिशु-माता मृत्यु के कारणों पर भी विचार किया गया। जिसमें रामगढ़ पांडवा की पूनम पत्नी राजेश की चार जून को हुई मौत के कारणों पर विचार किया गया। जिसमें खून की कमी एवं समय पर स्वास्थ्य सेवाएं न मिलना बड़ा कारण पाया गया। वहीं दो नवजात बच्चों की मौत के मामलों में कई बार रेफर करना भी बड़ा कारण बताया गया। इसके अलावा एक अन्य बच्चे के मामले में देरी से एंबुलेेंस पहुंचने का भी बड़ा कारण पाया गया।
लड़कियों की शिक्षा पर जोर
मीटिंग में रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल विज्ञान एवं चिकित्सा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. संदीप जैन ने कैथल में विभिन्न विद्यालयों की निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में लड़कियों की सुविधा के अनुरूप मूलभूत सुुविधाएं अवश्य प्रदान की जाएं, ताकि लड़कियां राजकीय विद्यालयों में शिक्षा प्राप्ति के लिए प्रेरित हो सकें। इस अवसर पर सीएमओ डॉ. वंदना भाटिया, उप सिविल सर्जन डॉ. नीलम कक्कड़, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरपी गोयल सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
दो दिन में दिए खामियों में सुधार के निर्देश
डीसी केएम पाडुरंग ने अधिकारियों को दो दिन में इन खामियों पर सुधार के निर्देश जारी किए। डीसी ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लड़कियों को शिक्षा, सुरक्षा तथा पोषण प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि लड़कियों को जन्म लेने का अधिकार के अलावा उन्हें शिक्षित करके स्वावलंबी बनने के लिए उन्हें पर्याप्त अवसर भी प्रदान करने होंगे। इस अभियान से जुड़े सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लें।