शहर में बिना किसी रोक-टोक के बेसमेंट बनाए जा रहे हैं। मुख्य मार्गों पर स्थित अधिकतर व्यवसायिक स्थलों के अलावा अब तक तो घरों में भी लोग बेसमेंट बनवाने लगे हैं। यह सब काम नगर परिषद से अनुमति लिए बिना हो रहा है। यदि हल्का सा भी भूकंप आया तो पूरा शहर भरभरा कर ढह जाएगा। इससे नुकसान कितना होगा, इसका शायद ही अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रशासन सबकुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे हुए है। नगर परिषद की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
शहर में सभी मुख्य मार्गों करनाल रोड, अंबाला रोड, ढांड रोड समेत पुराने शहर में व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का दोबारा निर्माण करते हुए साथ में बेसमेंट बनाए जा रहे हैं। इसमें नियमों को बिल्कुल दरकिनार किया जा रहा है। बेसमेंट बनाने के लिए सरकार की ओर से एक फार्मूला तय किया हुआ है लेकिन इसका कोई पालन नहीं करता।
ऐसा क्यों हो रहा
एडवोकेट मुकेश निरवानी ने कहा कि शहर में बिना अनुमति के अवैध रूप से बेसमेंट क्यों बन रहे हैं। प्रशासन को इनकी ओर ध्यान देना चाहिए। इससे न केवल बेसमेंट बना रहे मालिक का नुकसान है बल्कि आस-पड़ोस के लोगों का भी नुकसान होने का अंदेशा है। जो लोग अनुमति लेकर बना रहे हैं, परिषद के अधिकारी उनमें नियमों की पालना सुनिश्चित करें।
खुद और दूसरों के लिए खतरनाक
प्रो. डा. राजेंद्र ढुल ने कहा कि चंडीगढ़ सहित बड़े शहरों में बेसमेंट के कारण बड़े हादसे हो चुके हैं। हमारे शहर में बेसमेंट अवैध रूप से बनाए जा रहे हैं। यदि भूकंप आया तो न जाने कितना नुकसान होगा। बिना भूकंप के भी ये आस-पड़ोस के लोगों के लिए खतरनाक हैं।
बेसमेंट बनाने के लिए नगर परिषद से अनुमति लेना जरूरी है। परिषद के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है कि शहर में कितने लोगों ने बेसमेंट बनाए हैं। हर साल तीन सौ से चार सौ नक्शे पास होते हैं। इन्हीं में बेसमेंट भी हो सकते हैं। जहां खतरा होने का अंदेशा रहता है वहां नोटिस जारी किया जाता है। अवैध रूप से बेसमेंट बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ब्रिजेश हुड्डा, भवन निरीक्षक, नगर परिषद कैथल।