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अनुसूचित जाति का एक भी वोटर नहीं, फिर भी सीट रिजर्व

Mon, 04 Jan 2016 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
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गांव खेड़ी साकरा में एक वार्ड में एक भी वोट अनुसूचित जाति का नहीं है फिर भी इस वार्ड को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया। जिस कारण पंचायत चुनाव से पहले की गई वार्डबंदी लोगों के लिए जी का जंजाल बनी हुई है।
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आरटीआई कार्यकर्ता गांव खेड़ी साकरा निवासी अर्जुन पुत्र रण सिंह ने वार्डबंदी में मिलीभगत का आरोप लगाया है। आरटीआई कार्यकर्ता के अनुसार सूचना के अधिकार के तहत ली गई जानकारी में उसके गांव में कुल छह वार्ड हैं। वह वार्ड छह का वोटर है।

उनके वार्ड में कोई भी अनुसूचित जाति का वोटर नहीं है। फिर भी उनके वार्ड को अनुसूचित जाति की महिला पंच के लिए आरक्षित किया गया है। जबकि चुनाव आयोग के नियमानुसार आरक्षित किए गए वार्ड में अनुसूचित जाति का वोटर होना अनिवार्य है।
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उसने आरोप लगाया कि वार्डबंदी करने वाले तत्कालीन पटवारी ने मिलीभगत करके सामान्य वर्ग के वार्ड को अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित कोटे में दर्शा दिया है। आरटीआई कार्यकर्ता का कहना है कि उसने गलत तरीके से किए गए आरक्षित वार्ड को सामान्य वर्ग में करवाने के लिए डीसी से लेकर सीएम विंडो तक शिकायत की है लेकिन आज तक समस्या का हल नहीं हुआ।

तत्कालीन पटवारी पर आरोप लगाया कि उसने गलत वार्डबंदी करके जिला प्रशासन को गुमराह किया है जिसके खिलाफ  कार्रवाई होनी चाहिए और उनके वार्ड को फिर से सामान्य वार्ड की श्रेणी मेें तब्दील करना चाहिए।
इस संबंध में बीडीपीओ पूंडरी प्रेम सिंह ने कहा कि वार्डबंदी का कार्य उप तहसील ढांड के अधीन किया गया है। संबंधित पटवारी ने नायब तहसीलदार के माध्यम से जो भी रिपोर्ट सौंपी उसके आधार पर ही वार्डबंदी का कार्य पूर्ण किया गया है।
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