जिले में अधिकतर प्रदूषण जांच केंद्रों पर प्रदूषण जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। एक-दो केंद्रों को छोड़कर अधिकतर केंद्रों पर तो मोटरसाइकिल के पीछे से नंबरों की फोटो खींचकर प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है। बाइक चाहे जितना मर्जी धुआं छोड़े।
केवल 20 से 30 रुपये देकर प्रदूषण फैलाने का प्रमाणपत्र मिल जाता है। जिले भर में प्रदूषण जांच के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है। अमर उजाला ने शहर में स्थित प्रदूषण जांच केंद्रों पर जाकर प्रदूषण की जांच करने की प्रक्रिया जाननी चाही तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ग्राहक बनकर गए संवाददाता को पहले तो बिना वाहन दिखाए फीस के बारे में ही जानकारी देने से इंकार कर दिया गया।
जब प्रदूषण की जांच कर रहे युवक से पूछा कि प्रदूषण के स्तर की जांच कैसे करते हैं तो वह कोई जानकारी भी नहीं दे पाया। वह यह भी नहीं बता पाया कि मशीन में कितने प्रतिशत तक धुआं छोड़ने पर वाहन सड़क पर चलाने योग्य और कितने प्रतिशत धुएं पर यह वाहन सड़क पर चलाने योग्या नहीं है।
केंद्रों के बाहर नहीं कोई रेट लिस्ट
प्रदूषण केंद्रों के बाहर किसी प्रकार की रेट लिस्ट नहीं लगाई गई है। लोग मोटरसाइकिल को वहां पर खड़ा कर देते हैं और केंद्र संचालक 20 से 60 रुपये में प्रमाणपत्र काट कर दे देते हैं। एक केंद्र पर तो मोटरसाइकिल की पीछे से फोटो खींचकर बिना साइलेंसर की जांच के ही प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।
केवल पैसा वसूली
शहर वासी आनंद कुमार, पूजा रानी, प्रदीप शर्मा ने बताया कि वे हर छह माह में केंद्र पर जाकर प्रदूषण का प्रमाणपत्र बनवाते हैं। केंद्र पर किसी प्रकार जांच नहीं होती है। केवल मोटरसाइकिल का पीछे से नंबर नोट करके प्रमाणपत्र बना दिया जाता है। प्रदूषण को जांचने का उनके पास कोई पैरामीटर नहीं है। यह केवल लोगों से पैसे वसूली हो रही है।
कितना धुआं छोड़ते रहो कोई फर्क नहीं पड़ता
शहर वासी अनुज कुमार, पुनीत तितरम, सरदार हरपाल सिंह ने बताया कि गाड़ी से कितना भी धुआं निकल रहा है, इसका कोई मतलब नहीं है। प्रमाणपत्र लेने के बाद एक तरह से प्रदूषण फैलाने का लाइसेंस मिल जाता है जिसके कारण चालान नहीं कटता है।
बढ़ रहा है प्रदूषण
जिले भर में लगातार वाहन बढ़ रहे हैं। साथ ही बढ़ रहा है प्रदूषण लेकिन इसकी रोकथाम के लिए कोई प्रयास नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी जिले मेें कोई विशेष निगरानी नहीं हो रही है।
प्रदूषण केंद्रों जांच की जाएगी। जो केवल पैसे लेकर प्रमाणपत्र दे रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी करने से पहले आवश्यक जांच जरूरी है। यह केवल चालान से बचने की पर्ची मात्र नहीं होता।
मनदीप कौर, एसडीएम कैथल।
प्रदूषण जांच के लिए प्रमाणपत्र जारी करने वाले केंद्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियंत्रण में नहीं आते। इसके लिए चंडीगढ़ स्थित ट्रांसपोर्ट विभाग से अनुमति मिलती है।
एसडीओ नरेश कुमार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।