बराला साहब, कैथल के एसपी ने ही आरक्षण आंदोलन को भड़काया, यदि समय रहते पुलिस कार्रवाई करती तो व्यापारियों का इतना नुकसान न होता। ये आरोप पूंडरी के व्यापारियों ने जड़े। उन्होंने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को अपनी व्यथा सुनाई।
मंगलवार को व्यापारियों की समस्याएं सुनने पहुंचे सुभाष बराला को व्यापारियों की तीखी बातों का सामना करना पड़ा। व्यापार मंडलों के तीनों अध्यक्षों रामरूप प्रजापति, योगेश उप्पल व हरीश लाल ने इस आंदोलन के दौरान पुलिस कप्तान की भूमिका पर सवाल उठाए। इतना ही नहीं हलका विधायक दिनेश कौशिक ने भी एसपी कैथल की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए दावा किया कि उन्होंने खुद बार-बार एसपी कैथल को आंदोलन के उग्र होने की सूचना दी, पूंडरी में हो रही तबाही के बारे में बताया लेकिन एसपी ने कोई मदद नहीं भेजी, न ही खुद यहां पहुंचे।
बाद में वे इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मिले और सीएम ने एसपी कैथल से बात की। तब कहीं जाकर एसपी घटना के चार घंटे बाद पूंडरी पहुंचे। इस मौके पर राज्य मंत्री नायब सैनी, जिलाध्यक्ष सुभाष हजवाना, हलका विधायक दिनेश कौशिक, गुहला विधायक कुलवंत बाजीगर, रणधीर गोलन, डीएसपी सतीश गौतम, सुमिता ढाका समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
तब तक देर हो चुकी थी
कई व्यापारियों ने बराला के सामने एसपी कैथल और पूंडरी पुलिस स्टेशन में तैनात सभी कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए। व्यापारियों ने कहा कि जिस समय पूंडरी में उपद्रवी तांडव कर रहे थे, पूंडरी पुलिस के सभी कर्मचारी थाने में छिपकर बैठे थे। बाद में जब व्यापारियों ने पुलिस से मदद मांगी तो पुलिस ने हाथ खड़े कर दिए। काफी कहने के बाद जब पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे तो बहुत देर हो चुकी थी। उपद्रवियों ने व्यापारियों के प्रतिष्ठानों को क्षति पहुंचाने के बाद बस स्टैंड में खड़ी बसों को आग के हवाले कर दिया था।
हमने खुद संभाली कमान
मामला हद के ज्यादा बढ़ता देख व्यापारियों ने ही एकत्रित हो उपद्रवियों को वहां से खदेड़ा। बराला ने इस दौरान न केवल सभी व्यापारियों की बातों को सुना बल्कि उनको आश्वासन भी दिया। उन्होंने व्यापारियों से अपील की कि उनके पास इस घटनाओं के जो भी सबूत है वे उन्हें सरकार को उपलब्ध करवाएं ताकि दोषी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।