कॉलेज कैंपस में तो कोई चिंता नहीं रहती लेकिन जब घर से कॉलेज के लिए निकलते हैं और कॉलेज से घर के लिए निकलते हैं तो रास्ता तय करना मुश्किल हो जाता है। मनचले खुराना रोड, कमेटी चौक, सुभाष नगर से बाइक पर सवार होकर तंग करते हैं। जब इसकी शिकायत घर में करते हैं तो परिजन कहते हैं कि कॉलेज मत जाओ, इसमें हमारा क्या कुसूर है?
ईव टीजिंग के खिलाफ अमर उजाला के अभियान में मंगलवार को जाट कॉलेज की छात्राओं ने अपनी पीड़ा बताई। छात्राओं ने बताया कि कॉलेज के गेट से लेकर घर तक गंदे-गंदे कॉमेंट सुनने पड़ते हैं। कुछ छात्राएं हिम्मत करके अगर इसकी शिकायत अभिभावकों को कर दें तो परिजन कॉलेज न जाने के लिए बोलते हैं। इस कारण मजबूर होकर मनचलों की हरकतों को घर पर नहीं बतातीं।
यह कहा छात्राओं ने
छात्रा निताशा ने बताया कि सुभाष नगर, गुरुनानक पुरी कॉलोनी की गलियों में काफी लड़के खड़े रहते हैं। बाइक पर लड़कियों के आगे पीछे चक्कर लगाते हैं। कुछ छात्राएं ऐसी भी थीं जो केवल छेड़छाड़ की घटनाओं के कारण कॉलेज छोड़ गईं। निताशा ने रोहतक में हुई घटना का0 जिक्र करते हुए कहा कि लड़कियों को भी जो हकीकत हो उसे बोलना चाहिए। झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। छात्रा पूजा ने बताया कि शहर में लोकल बस सेवा शुरू की गई है लेकिन उसके अंदर इतनी भीड़ होती है कि अगर छात्राएं चढ़ती हैं, तो उन पर अनाप-शनाप हूटिंग होती है जिसके कारण वे बस में नहीं बैठतीं।
छात्रा रेनु ने बताया कि अभिभावक अगर लड़कियों का सहयोग करें तो पूरी तरह से छेड़छाड़ की घटनाएं रुक सकती हैं। अभिभावक लड़कों की तरह लड़कियों की समस्या को लें और उसका हल निकाले न कि उसे घर पर ही पढ़ाई करने का दबाव डालें। छात्रा अंजू ने बताया कि ऐसी बहुत सी घटनाएं हैं जिन्हें छात्राएं अभिभावकों व कॉलेज प्रशासक को नहीं बताती हैं। उनके मन में डर घर कर गया है।
कैंपस के बाहर छात्राओं के लिए समस्या है। बसों में भीड़ का शरारती तत्व फायदा उठाते हैं। लोगों को सोच बदलनी होगी। साथ में प्रशासन लड़कियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए।
प्रभजोत कौर, इंचार्ज, कॉलेज की महिला विंग