नीम साहब गुरूद्वारे में आयोजित बैठक के दौरान एकत्रित हरियाणा सिख गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के पा
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कैथल। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के निवर्तमान छह सदस्य शनिवार को गुरुद्वारा नीम साहब पहुंचे। वहां पर उन्होंने नई कमेटी व अध्यक्ष के चुनाव पर चर्चा की। पत्रकारों से बातचीत में कमेटी के निवर्तमान महासचिव जसबीर सिंह ने कहा कि एचएसजीपीसी की नई कमेटी सिखों को मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि नवनिर्वाचित प्रधान महंत कर्मजीत सिंह न तो अमृतधारी सिख हैं और न ही इस कमेटी को चलाने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि 1925 में बड़ी जद्दोजहद करके महंतों से गुरुघर खाली करवाए थे। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जो कमेटी सरकार ने बनाई है, वह आरएसएस की कमेटी है। इसकी वे घोर निंदा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इससे यह पता चलता है कि हरियाणा सरकार हरियाणा के सिखों के धार्मिक मसलों में सीधा हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने हरियाणा के सिखों से अपील है कि इनके खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करके इस कमेटी को रद करवाएं ताकि हरियाणा के गुरुघरों की गुरसिख व अमृतधारी सिख संभाल कर सेवा सके। इस अवसर पर उन्होंने कहा 25 सदस्यों ने सर्वसम्मति से सरदार अमरिंद्र सिंह अरोड़ा को प्रधान चुना था। वे सभी सदस्यों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखते हैं। पिछले 20 साल से हरियाणा की गुरुद्वारा कमेटी को अलग करवाने में उनका अहम योगदान रहा है। आज भी वे और सभी सदस्य अमरिंद्र सिंह अरोड़ा को इस संघर्ष कमेटी का प्रधान मानते हैं और उनसे आग्रह करते है कि वो आगे आएं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने उन्हें व उनके साथ लगे सभी संघर्षशील साथियों को सदस्य न बना यह साबित कर दिया कि वह मनमानी करना चाहती है। उन्होंने कहा कि वे फिर से संघर्ष करेंगे। बैठक में पूर्व उप प्रधान बलदेव सिंह बल्ली, वरिष्ठ उप प्रधान करनैल सिंह निमनाबाद, पूर्व सह सचिव चनदीप सिंह, सदस्य हरप्रीत सिंह नरूला व अजमेर सिंह सैनी मौजूद रहे।