कैथल। कैथल न्यायालय में 20 साल से सिविल एवं क्रिमिनल अधिवक्ता के तौर पर प्रैक्टिस कर रहे नरंजन ढुल का झारखंड में बतौर जिला अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश चयन हुआ है। इससे परिवार सहित वकीलों में खुशी की लहर है। नरंजन ढुल ने 37 साल की उम्र में न्यायाधीश बनने के लिए तैयारी शुरू की थी। सत्र न्यायाधीश बनने के लिए कम से कम उम्र 35 साल निर्धारित है। इसी कारण उन्होंने 35 साल के बाद ही तैयारी शुरू की।
अपने चयन होने पर बातचीत में नरंजन ढुल ने बताया कि वे गांव सेरहधा के रहने वाले हैं। वे वकालत करने के बाद वर्ष 2002 में जिला न्यायालय में प्रैक्टिस करने लगे थे। उन्होंने पहले वकील बनने का सोचा था। वकालत करते हुए उन्होंने फैसला लिया कि अतिरिक्त एवं जिला सत्र न्यायाधीश के लिए तैयारी करें। उन्होंने तैयारी शुरू की। वर्ष 2017 में उन्होंने गुजरात में अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश के लिए परीक्षा पास की। इसके बाद इसी साल झारखंड में भी उन्होंने परीक्षा पास की। इसके बाद भी उन्होंने तैयारी जारी रखी। अब झारखंड में उनका बतौर जिला अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश चयन हुआ है। यह परीक्षा 66 उम्मीदवारों ने पास की थी। जिसमें से 13 का चयन हुआ है। कुल 22 पदों के लिए यह परीक्षा हुई थी। न्यायाधीश बनें नरंजन ढुल ने बताया कि गांव सेरहधा में किसान चतर सिंह के बेटे हैं। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि ईमानदारी से काम करते हुए लोगों को न्याय दिलवाएं।
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान वेदप्रकाश ढुल सहित पूरी कार्यकारिणी व जिला बार के वरिष्ठ सदस्यों ने नरंजन ढुल को न्यायाधीश बनने पर बधाई दी। प्रधान वेदप्रकाश ढुल ने कहा कि यह पूरी बार के लिए गौरव का विषय है कि हमारे के एक सदस्य अतिरिक्त एवं जिला न्यायाधीश बनें।