कलायत। शुक्रवार सुबह तेज हवा और बारिश ने उपमंडल के किसानों की मेहनत पर पूरी तरह से पानी फेर दिया। गेहूं की फसल जमीन पर बिछी दिखी तो उनके चेहरे उतर गए। भूपेंद्र सिंह, महावीर, रमन, सुखदेव, छोटा सिंह व सुरेंद्र भाटू कहा कि चार दिन पहले आई बरसात व तेज हवाओं में जो गेहूं बच गई थी वो शुक्रवार सुबह आई बरसात से पूरी तरह से गिर गई।
उन्होंने कहा कि इस बार गेहूं की पैदावार बंपर होने की उम्मीद थी पर प्राकृतिक आपदा ने किसानों की सारी आशाओं पर पानी फेर दिया। सुरेंद्र ने कहा कि अधिकांश किसान भूमि को 50 से 60 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से ठेके पर लेकर खेती करते हैं। एक एकड़ पर लगभग 30 हजार रुपये खर्च फसल की पैदावार लेने पर आता है। किसानों के सिर पर पहले ही बहुत कर्जा चढ़ा हुआ है। इस सप्ताह में लगातार आ रही प्राकृतिक आपदा के चलते किसान पूरी तरह से बर्बाद हो कर रह गए।
राजबीर लांबा ने कहा कि उन्होंने 11 एकड़ भूमि में गेहूं की फसल तैयार की थी। चार दिन पूर्व आई आफत में कहीं कहीं गेहूं बच गई थी लेकिन बरसात व तेज हवाओं ने पूरी तरह से फसल को बिछा कर रख दिया। गेहूं की बालियों में अभी दाना पूरी तरह से बना नहीं था जिससे पैदावार शून्य के बराबर मिलने की उम्मीद है। किसानों ने मांग की है कि उनके खाते में सरकार 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा राशि के रूप में डाले।
खेतों में खड़ी फसलों को काफी नुकसान
सीवन। पिछले दिनों हुई तेज बरसात के कारण खेतों में खड़ी फसलों को काफी नुकसान हुआ है। किसान बलविंद्र सिंह, बूटा राम, जसविंद्र सिंह, कुलदीप सिंह, तरसेम सिंह, जरनैल सिंह, गज्जन सिंह, अंतरजीत सिंह व राजविंद्र सिंह ने कहा कि गेहूं की फसल की कटाई में तो अभी देर है, लेकिन पिछली बरसात के बाद चली तेज हवा के कारण गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है। इसके कारण से गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ेगा। किसानों को इसके कारण से बहुत नुकसान होगा। सरसों की कटाई चल रही थी और काटी हुई सरसों अभी खेतों में ही पड़ी थी। सीवन में सरसों का क्षेत्र काफी कम है परंतु जितने भी क्षेत्र में सरसों लगाई गई थी उसमें खासा नुकसान किसानों को उठाना पड़ा है। संवाद
धरी रह गईं उम्मीद
राजौंद। किसानों ने बे-मौसमी बरसात व तूफान से खराब फसलों के मुआवजे की मांग की है। उनकी उम्मीद धरी रह गईं।
पिछले दिनों आई तेज हवाओं व बरसात से कई स्थानों पर ओलावृष्टि से कई किसानों की फसलों पर पानी फेर दिया है। किसानों की गेहूं की फसल पकने वाली थी। फसलों में सुनहरा रंग आ चुका था। उम्मीद लगाई जा रही थी की मंडियों में किसानों का पीला सोना पांच अप्रैल के लगभग आ जाएगा। लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिख रहा है। किसान गुरनाम सिंह, सूबे सिंह तेजवीर, ओम प्रकाश, लाडी, दीपा सिंह ने कहा कि खेतों में अभी बारिश का पानी खड़ा है। इसके चलते पानर नहीं सूखता है और बारिश हो जाती है तो किसानों की ऐसे खेतों में 100 प्रतिशत फसल औनष्ट हो जाएगी। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा है कि गिरदावरी करवाकर उनको मुआवजा दिया जाए। यदि दोबारा बारिश होती है तो किसान पूरी तरह से टूट जाएगा। संवाद
बूंदाबांदी ने बढ़ाई चिंता, आज भी बारिश होने की आशंका
कैथल। शुक्रवार सुबह बूंदाबांदी होन व आसमान में बादल छाने से किसानों की चिंता बढऩे लगी है। बारिश होने पर किसानों की सरसों व गेहूं की फसलों को नुकसान पहुंचेगा। जिले में शुक्रवार सुबह आठ से साढ़े दस बजे तक कई जगह बूंदाबांदी हुई। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई। उधर, मौसम में ठंडक होने से तापमान भी तीन दिन से एक जैसा ही बना हुआ है।
जिले में इस बार बारिश फसल पकने के दौरान हुई है। इससे फायदा कम, नुकसान ज्यादा हुआ है। अभी दो दिन पहले बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई थी। इससे भी फसलों को काफी नुकसान हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार 24 व 25 मार्च को भी कई जगह बारिश होने की संभावना जताई गई थी। ऐसे में मौसम शुक्रवार को सुबह खराब होने लगा है। पूरा दिन से बादल छाए रहे और 13 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चली।
किसान साहिल चहल, महाबीर, प्रदीप, रामा, कृष्ण व जयभगवान का कहना है कि बारिश हो जाती है तो उनकी खेतों में कटी सरसों की फसल खराब हो जाएगी। अब तो अन्य फसलों की भी कटाई हो रही है, बारिश होने से उन्हें भारी नुकसान होगा। सबसे ज्यादा नुकसान इस साल सरसों की कटी पड़ी फसल व गेहूं की फसल में होगा।
शुक्रवार को कैथल का अधिकतम तापमान 25.1 डिग्री व न्यूनतम तापमान 17.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। बीते तीन दिन से तापमान समान बना हुआ है। चार दिन पहले अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका था। न्यूनतम तापमान भी 20 डिग्री सेल्सियस था।
दूसरी ओर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि 25 मार्च तक बरसात की संभावना जताई जा रही है। किसान गेहूं की फसलों में पानी न दें और जहां पर अधिक पानी जमा है वहां से पानी निकाल दें। ताकि बरसात आती है तो फसल को खराब होने से बताया जा सके।