नगर परिषद की करीब एक साल बाद हुई हाउस की बैठक बुधवार को हंगामे की भेेंट चढ़ गई। एक मुद्दे पर पूरी चर्चा व दूसरे मुद्दे पर अधूरी चर्चा के दौरान बीच में ही बैठक खत्म हो गई। पार्षदों के बीच जबरदस्त हंगामे के चलते चेयरमैन सीमा कश्यप व अधिकारीगण बैठक छोड़कर बाहर निकल आए। बैठक को फिलहाल आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया गया। बैठक में सफाई व स्ट्रीट लाइट के मुद्दे पर ही चर्चा हो सकी।
इस दौरान हंगामा उस दौरान हुआ जब एक सवाल के जवाब में लाइट इंस्पेक्टर जवाब दे रहे थे और बीच में कुछ पार्षदों द्वारा इसे सदन की मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए उन्हें बाहर जाने को कहा। उधर, कुछ पार्षद लाइट इंस्पेक्टर के समर्थन में आ गए। इसी को लेकर सदन में जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया और इसी शोरगुल के चलते सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी गई।
हाउस की बैठक निर्धारित समय पर सुबह 11 बजे शुरू हुई। जिसमें चेयरमैन सहित 23 पार्षद पहुंचे। पहले सफाई पर चर्चा हुई। करीब एक घंटे तक बैठक चली। जिसमें सफाई कर्मचारियों के पास सफाई के लिए आवश्यक उपकरण न होने सहित अन्य मुद्दे उठाए गए। इस दौरान पार्षद प्रतिनिधि दलबीर भान ने तो उनके वार्ड में पुलिया का निर्माण न होने पर पद से इस्तीफा तक देने की बात कह दी। इसके बाद स्ट्रीट लाइट के मुद्दे पर चर्चा शुरू हुई।
तमाम सवालों के बीच पार्षदों ने सवाल उठाया कि लाइट ठीक करने का ठेका दिए जाने के बावजूद शहर में सैकड़ों लाइट खराब पड़ी हैं। इस पर एक्सईएन से जवाब मांगा गया तो उन्होंने लाइट इंस्पेक्टर को सदन में बुला लिया। लाइट इंस्पेक्टर के जवाब देने के तरीके पर पार्षदों ने सवाल उठा दिए। इसी बीच पार्षदों के बीच नोकझोंक हो ही रही थी कि लाइट इंस्पेक्टर ने आरोप जड़ दिया कि चेयरमैन के दबाव में वर्ष 2018 के बिल अब 2021 में पास किए गए हैं। करीब 54 लाख रुपये का गलत भुगतान किया गया है।
लाइट इंस्पेक्टर ने कहा कि उनके ऊपर हटाने का दबाव बनाया जा रहा है। कुछ पार्षद भी उन पर दबाव डाल रहे हैं। इसी बीच पार्षद मोहन लाल शर्मा व पार्षद संजय भौरिया ने लाइट इंस्पेक्टर के लहजे पर सवाल उठाया और कहा कि लाइट इंस्पेक्टर को बाहर निकाला जाए।
इसी बीच पार्षद विनोद सोनी, पार्षद गोपाल सैनी, पार्षद निशा गर्ग, पूर्व चेयरमैन यशपाल प्रजापति ने लाइट इंस्पेक्टर का पक्ष सुनने की वकालत की। दोनों ओर से हुए जबरदस्त हंगामे के बीच चेयरमैन सीमा कश्यप अपनी सीट से उठीं और बैठक से बाहर चली गईं। इसके बाद ईओ सहित तमाम अधिकारी भी बाहर चले गए। इसके बाद भी पार्षदों के बीच खूब हंगामा हुआ और लाइट इंस्पेक्टर ने बिना काम किए 54 लाख रुपये के बिल पास करवाने सहित उपकरणों को घरों में प्रयोग करने तक के आरोप जड़ दिए और कहा कि उन्हें इन बिलों का विरोध करने के कारण हटाया जा रहा है।
बाद में ईओ बलबीर सिंह ने कहा कि लाइट इंस्पेक्टर अरविंद द्वारा लगाए गए सभी आरोप गलत हैं। इस कर्मचारी का बैठक में व्यवहार ठीक नहीं रहा। जिस कारण हुए हंगामे के चलते बैठक स्थगित कर दी गई है। चेयरपर्सन की अनुमति से फिर से बैठक बुलाई जाएगी।
चेयरमैन के प्रतिनिधि सुरेश कश्यप ने कहा कि बैठक में लाइट इंस्पेक्टर के व्यवहार के कारण बढ़ते विवाद को देखते हुए यह स्थगित कर दी गई है। बिल पास करवाने सहित अन्य लाइट इंस्पेक्टर द्वारा लगाए गए आरोप निराधार है। जांच करवा ली जाए, असली बात सामने आ जाएगी। पार्षदों की सहमति से फिर से बैठक बुलाई जाएगी।