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जिला प्रशासन, ग्रो-डीजल व ग्रामण विकास ट्रस्ट के बीच हुआ एमओयू

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किसानों की आय बढ़ोत्तरी व पर्यावरण संरक्षण के लिए पराली व अन्य अवशेषों से सीएनजी बनाने के लिए जिला प्रशासन, ग्रो-डीजल व ग्रामीण विकास ट्रस्ट के बीच एमओयू पर डीसी सुजान सिंह व ग्रो डीजल के सीईओ अतुल सक्सेना, ग्रामीण विकास ट्रस्ट के सीईओ शेखर व सीएमजीजीए पांखुरी गुप्ता ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के बाद जिला में पराली व अन्य वेस्ट डिमांड बढ़ेगी और किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
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डीसी सुजान सिंह ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तैयार होने से जिला स्तर पर रिफाइनरी का निर्माण होगा, जिसमें एफपीओ यानह फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाईजेशन के माध्यम से किसानों की पराली खरीदी जाएगी और प्लांट तक भिजवाई जाएगी, जहां पर इस वेस्ट से सीएनजी का निर्माण होगा। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि वेस्ट को रिसाइकिल करके जीरो वेस्ट बनाना है और किसानों की आय को भी बढ़ाना है। इस प्रोजेक्ट के तहत सभी खंडों में कलस्टर वाइज यूनिट लगाई जाएगी, जहां पर वेस्ट से रागवेल बनाया जाएगा और यहां से क्रुड ऑयल तैयार करके जिला स्तरीय रिफाइनरी में लाकर सीएनजी बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिला में एफपीओ के माध्यम से इस समूचे कार्य को किया जाएगा। नए प्रोजेक्ट के लगने से किसानों की आमदनी में ईजाफा होगा, जिला में लगभग एक लाख 15 हजार हेक्टेयर के लगभग क्षेत्र में धान का उत्पादन होता है, इसलिए इस क्षेत्र में पराली की उपलब्धता अधिक है, जोकि इस प्रोजेक्ट के लिए महत्वपूर्ण है। जिला के एफपीओ को सेमिनार के माध्यम से जागरूक किया जाएगा तथा वेस्ट को जिला स्तर पर पहुंचाने हेतू हर संभव मदद भी की जाएगी।
सीएम सुशासन सहयोगी का रहा अहम योगदान- डीसी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी पांखुरी गुप्ता ने जिला में पराली जलाने की समस्या को दूर करने के लिए तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक सोच रखते हुए इस प्रोजेक्ट की परिकल्पना तैयार की और ग्रो डीजल व ग्रामीण विकास ट्रस्ट से समन्वय स्थापित कर पूरे प्रोजेक्ट की रूप रेखा तैयार की। उन्होंने कहा कि इस प्रोजैक्ट के पूरा होने से सीएनजी गैस बनेगी और क्षेत्र के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
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ऐसे काम करेगा सिस्टम-यह प्रदेश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जहां समूची प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से चलाया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नही हो। इसके लिए 70 एफपीओ बनाए जाएंगे। प्रत्येक ब्लॉक में ग्रामीण विकास ट्रस्ट एफपीओ के माध्यम से पराली व अन्य एग्री वेट वेस्ट एकत्रित करेंगे। इसके बाद प्रत्येक खंड में ग्रो-डीजल कंपनी द्वारा बनाए जाने वाले रॉग वैल में भेजेंगे, जहां पर संबंधित सीईओ उस रॉ मैटेरियल को क्रुड ऑयल में परिवर्तित करके पाइप लाइन के माध्यम से जिला स्तरीय रिफाइनरी में भेजेंगे, जहां पर सीएनजी का निर्माण होगा।
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