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Kaithal News: लाखों खर्च, फिर भी नहीं सुधरे शहर के पार्क

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कैथल के बस अड्डे के पीछे बने ट्रैफिक पार्क में टूटी पड़ी कुर्सी। संवाद
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कैथल। शहर में पार्कों के रखरखाव पर प्रशासन की ओर से हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद हालात में सुधार नहीं हो पा रहा है। शहर के ट्रैफिक पार्क, ताऊ देवीलाल पार्क, शहीद ऊधम सिंह पार्क और जवाहर पार्क की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बनी हुई है। सुबह-शाम सैर और व्यायाम करने के लिए पहुंचने वाले लोगों को बदहाल सुविधाओं के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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ट्रैफिक पार्क और शहीद ऊधम सिंह पार्क में जगह-जगह बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है। लोगों का कहना है कि इससे जहरीले जीव-जंतुओं के निकलने का खतरा बना रहता है। साथ ही मच्छरों की भरमार होने से मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। ट्रैफिक पार्क में कई स्थानों पर कुर्सियां टूटी पड़ी हैं जिसके कारण लोगों को मजबूरन ट्रैक पर बैठना पड़ता है। पार्क की घास इतनी बढ़ चुकी है कि ओपन जिम के उपकरण तक उसमें दब गए हैं। पीने के पानी की समुचित व्यवस्था भी नहीं है और वाटर कूलर से गर्म पानी आ रहा है।
वहीं शौचालयों की सफाई व्यवस्था भी खराब बनी हुई है। बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी देने के उद्देश्य से ट्रैफिक पार्क में लगाई गई सिग्नल लाइटें पिछले करीब दो वर्षों से बंद पड़ी हैं। कई लाइटें टूट चुकी हैं जबकि बाकी खराब हैं। एक सिग्नल लाइट तो आरटीए कार्यालय जाने वाली सड़क पर गिरी पड़ी है लेकिन इसके बावजूद समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन समाधान नहीं हो रहा। लोगों ने आरोप लगाया कि पार्कों के सुधारीकरण के नाम पर हर वर्ष करीब 50 लाख रुपये खर्च दिखाए जाते हैं, जबकि धरातल पर रखरखाव नजर नहीं आता। सैर करने आने वाले लोगों ने प्रशासन से पार्कों में नियमित सफाई, पेड़ों की कटाई-छंटाई, नई कुर्सियां लगाने, लाइट व्यवस्था दुरुस्त करने और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
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ऊधम सिंह पार्क में हादसे का खतरा
जगजीत सिंह ने बताया कि शहीद ऊधम सिंह पार्क में बच्चों के झूले जर्जर हो चुके हैं। कई झूलों के हिस्से टूटे पड़े हैं और उनमें जंग लग चुका है। ओपन जिम के उपकरण भी खराब पड़े हैं। पार्क की कई टाइलें उखड़ चुकी हैं जिससे लोगों को पैदल चलने में परेशानी होती है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो यहां किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। पार्कों में सफाई व्यवस्था बेहद खराब है। पार्कों के शौचालय बदहाल हैं जिससे महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है।
जवाहर पार्क में बंद पड़े फव्वारे
रामेश्वर सिंह ने बताया कि शहर के सबसे पुराने जवाहर पार्क में फव्वारे लंबे समय से बंद पड़े हैं। गर्मी का मौसम शुरू होने के बावजूद इन्हें चालू नहीं किया गया है। कई फव्वारों में गंदगी जमा है और उनमें पेड़-पौधों के सूखे पत्ते फंसे हुए हैं। फव्वारों के नीचे का हिस्सा जंग खा चुका है। पार्क में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक भी बना हुआ है। कई बार बंदर लोगों पर हमला कर चुके हैं। करीब एक सप्ताह पहले भगत सिंह कॉलोनी निवासी मंदीप को पार्क में एक लावारिस कुत्ते ने काट लिया था। पार्क में कई पोल पर लाइटें नहीं हैं और बिजली के तार खुले पड़े हैं जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है।
ताऊ देवीलाल पार्क में जगह-जगह गंदगी के लगे ढेर
खजान सिंह ने बताया कि ताऊ देवीलाल पार्क में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। कूड़ेदान टूटे पड़े हैं। कूड़ा कचरा इधर-उधर बिखरा पड़ा रहता है। बैठने के लिए लगाई गई कई कुर्सियां भी क्षतिग्रस्त हैं। पार्क के चारों ओर लगी ग्रील टूट चुकी है और कई जगह पर उसमें जंग लग चुका है। जर्जर ग्रील कभी भी गिर सकती है। टाइल भी कई जगह से टूटी पड़ी हैं। प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
पार्कों का समय-समय पर सुधारीकरण करवाया जाता है। साफ-सफाई की समस्या को जल्द दूर कर दिया जाएगा। लोगों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी। जवाहर पार्क में बंद पड़े फव्वारों को भी जल्द ठीक कराया जाएगा।
- वरूण शर्मा, एमई नगर परिषद कैथल

कैथल के बस अड्डे के पीछे बने ट्रैफिक पार्क में टूटी पड़ी कुर्सी। संवाद

कैथल के बस अड्डे के पीछे बने ट्रैफिक पार्क में टूटी पड़ी कुर्सी। संवाद

कैथल के बस अड्डे के पीछे बने ट्रैफिक पार्क में टूटी पड़ी कुर्सी। संवाद

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