संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह बिजली के खंभों पर लगे मीटर बिना ढक्कन के खुले पड़े हैं, जबकि कई मीटर खंभों पर काफी नीचे लटक रहे हैं। ऐसे में बारिश के दौरान इनमें पानी घुसने से स्पार्किंग की घटनाएं बढ़ रही हैं और कई बार मीटर जलने तक की नौबत आ जाती है।
पिछले वर्ष अप्रैल से जुलाई के बीच 70 से अधिक मीटर जलने के मामले सामने आए थे। खुले मीटरों में नमी जाने से शॉर्ट सर्किट की आशंका बनी रहती है। एक मीटर में आई खराबी आसपास लगे अन्य मीटरों को भी प्रभावित कर देती है, जिससे एक साथ कई घरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है और पूरे इलाके में अंधेरा छा जाता है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि कई बार मीटरों से चिंगारियां निकलती हैं और इसकी शिकायत भी निगम को दी जाती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। शहर के कई हिस्सों में 15-15 साल पुराने जर्जर मीटर अब भी लगे हुए हैं, जो तकनीकी रूप से कमजोर हो चुके हैं और इनमें आग लगने या करंट फैलने का खतरा बना रहता है।
पुराने खंभे भी बढ़ा रहे खतरा : शहरवासी राजू का कहना है कि कई इलाकों में अब भी पुराने लोहे के बिजली खंभे लगे हुए हैं, जिनमें करंट फैलने की संभावना अधिक रहती है। आधुनिक और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद इन्हें बदला नहीं गया है। सेक्टर-19, 20, 18, भगत सिंह कॉलोनी, करनाल रोड, ढांड रोड, जनकपुरी कॉलोनी, छात्रावास रोड, अर्जुन नगर, मुख्य बाजार और अंबाला रोड पर बड़ी संख्या में मीटर बिना ढक्कन के लटके हुए हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है।
जमीन से सटे ट्रांसफार्मर
और फ्यूज बने जोखिम
शहरवासी नरेश कुमार के अनुसार कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर और फ्यूज जमीन के बेहद करीब लगे हुए हैं, जो तीन फीट से भी नीचे आ चुके हैं। बारिश के समय इनसे करंट फैलने की आशंका बनी रहती है, जिससे राहगीरों के साथ-साथ बेसहारा पशु भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। कबूतर चौक के पास दो ट्रांसफार्मर चबूतरे पर रखे हुए हैं, जहां आसपास रेहड़ी वाले खड़े रहते हैं और करंट लगने का खतरा बना रहता है।
समय-समय पर नए मीटर लगाए जाते हैं और खराब मीटरों को बदला जाता है। उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। यदि किसी को मीटर संबंधी शिकायत है तो वह बिजली निगम कार्यालय में आकर संपर्क कर सकता है। -सोमबीर भालोठिया, एसई, बिजली निगम
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पुराने बस अड्डे के सामने टूटे पड़े खंभों पर लगे हुए मीटर के ढक्कन। संवाद