संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सेवा सद्भावना दिवस पर अमर शहीद मदन लाल ढींगरा स्मारक, पार्क रोड में आयोजित विशाल चिकित्सा शिविर में समाजसेवियों और आमजन को स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ पीसी-पीएनडीटी एक्ट के प्रति जागरूक किया गया। लोगों को समाज की बेहतरी के लिए कन्या भ्रूण हत्या रोकने और लिंगानुपात सुधारने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का आयोजन श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति, जीओ गीता परिवार एवं पंजाबी वेलफेयर सभा कैथल की ओर से किया गया। शिविर में सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला के मार्गदर्शन में पीएनडीटी के जिला नोडल अधिकारी डॉ. सचिन मांडले ने कहा कि पीसी-पीएनडीटी एक्ट का मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना और लिंगानुपात में सुधार करना है। उन्होंने बताया कि गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग बताना, पूछना या उसकी जांच करवाना पूरी तरह गैरकानूनी है।
उन्होंने कहा कि भ्रूण लिंग जांच करवाना या करवाने का प्रयास करना, गर्भ में बच्चे का लिंग बताना, बिना पंजीकरण अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाना, रिकॉर्ड का सही रखरखाव न करना और लिंग जांच संबंधी विज्ञापन करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।
डॉ. मांडले ने बताया कि एक्ट के उल्लंघन पर पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सजा और 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। दोबारा अपराध करने पर पांच वर्ष तक की सजा और 50 हजार रुपये से अधिक जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही संबंधित चिकित्सक का पंजीकरण भी निलंबित या रद्द किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि लिंग जांच करवाने वाले व्यक्ति या इसके लिए दबाव डालने वालों को भी पांच वर्ष तक की सजा अथवा एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
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िभाग की ओर से भ्रूण लिंग जांच संबंधी सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाती है। सही और पुख्ता सूचना देने वाले को एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है।