संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। नगर पालिका चीका की उपाध्यक्ष पूजा शर्मा को हटाने की विपक्षी कवायद पर फिलहाल संशय के बादल मंडराने लगे हैं। दरअसल, अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों में शामिल तीन पार्षदों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा, कयास लगाए जा रहे हैं।
उपाध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को पारित कराने के लिए 12 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता है और विपक्षी गुट लगातार 12 पार्षदों का समर्थन होने का दावा करता रहा है, लेकिन दो दिन पहले तीन पाषदों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने से समीकरण बिगड़ गए हैं। सवाल है कि क्या वे मतदान में शामिल होंगे या नहीं। इनमें से एक पार्षद पर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने मामला दर्ज कर लिया है जबकि अन्य दो की जांच जारी है।
उधर, विपक्षी नेता तरसेम गोयल का कहना है कि तीनों पार्षद बैठक में भाग लेंगे और मतदान भी करेंगे। उनका तर्क है कि फिलहाल केवल आरोप लगे हैं, सच्चाई सामने आने में समय लगेगा। अविश्वास प्रस्ताव की बैठक तीन जुलाई को दोपहर 12 बजे नगर पालिका कार्यालय चीका में होनी है।
नगर पालिका अध्यक्ष को, जो सीधे जनता की ओर से चुना जाता है। हटाने के लिए कम से कम 14 पार्षदों का विरोध में मतदान आवश्यक है जबकि उपाध्यक्ष, जिसे पार्षदों द्वारा चुना जाता है, उसे हटाने के लिए केवल 12 पार्षदों का समर्थन पर्याप्त होता है। इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए विपक्ष ने अध्यक्ष की बजाय पहले उपाध्यक्ष को हटाने की रणनीति बनाई।
अविश्वास प्रस्ताव को विफल करने के लिए सत्ता पक्ष भी पूरी तरह सक्रिय है। विपक्षी पार्षदों को तोड़ने की कोशिशों के साथ-साथ आरोपित पार्षदों पर दर्ज मामलों में त्वरित कार्रवाई करवाकर उन्हें बैठक से दूर रखने की योजना बनाई गई है।
उधर, भ्रष्टाचार के आरोपों की जद में आए वार्ड-14 के पार्षद जितेंद्र कुमार और वार्ड-9 के पार्षद राजेश ठाकुर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों के फोन बंद मिले और वे अपने संस्थानों से भी अनुपस्थित पाए गए।
स्थिति वहीं की वहीं रह जाती ः दलबीर सिंह सीड़ा
विपक्षी पार्षदों के अग्रणी नेता दलबीर सिंह सीड़ा ने बताया कि अध्यक्ष को हटाने के लिए उन्हें सिर्फ दो अतिरिक्त पार्षदों की जरूरत थी, जिनका समर्थन वे जुटा चुके थे। लेकिन अगर अध्यक्ष हटती तो कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी कानूनन वाइस चेयरपर्सन को मिल जाती और स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आता। इसलिए पहले उपाध्यक्ष को हटाकर अपने गुट से किसी को इस पद पर लाने की रणनीति बनाई गई। उसके बाद अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना है।
जुटे थे अध्यक्ष को हटाने के लिए, फिर बदली रणनीति
करीब छह महीने पहले असंतुष्ट पार्षदों ने पालिका अध्यक्ष रेखा रानी को हटाने के प्रयास शुरू किए थे। उस समय उनके साथ नौ पार्षद थे, जो बाद में बढ़कर 12 हो गए। लेकिन चूंकि अध्यक्ष को हटाने के लिए 14 पार्षदों की जरूरत थी, विपक्षी गुट ने उपाध्यक्ष पूजा शर्मा को अपने पाले में लाने की कोशिश की। जब उन्होंने पाला बदलने से इन्कार कर दिया तो विपक्षी पार्षद उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आए।