शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के बीच आपसी सामंजस्य न होने पर स्कूली बच्चों को मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को भी स्कूलों में नाम मात्र बच्चे पहुंचे। पिछले एक सप्ताह से विद्यार्थी मेडिकल प्रमाण बनवाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर भटक रहे हैं। जिससे बोर्ड की कक्षाएं प्रभावित हो रही है। स्कूलों में अध्यापक खाली बैठकर टाइम पास कर चले जा रहे है। ये स्थिति रोजाना बनी हुई है।
शनिवार को अमर उजाला की टीम ने स्कूलों की पड़ताल की तो हालात इस तरह से मिले-
राजकीय स्कूल हजवाना में एक भी बच्चा नहीं पहुंचा- शनिवार को पूंडरी के गांव हजवाना के राजकीय स्कूल में एक भी विद्यार्थी नहीं पहुंचा। इस संदर्भ में स्कूल प्रशासन से बातचीत की गई तो मेडिकल प्रमाण पत्र के बिना स्कूल नहीं पहुंच रहे। वहीं कार्यरत स्टाफ सदस्यों ने कहा कि विभाग के आदेशों के बाद मेडिकल प्रमाण पत्रों के साथ ही बच्चों को स्कूलों मेें प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए बच्चे रोजाना स्वास्थ्य केंद्रों पर जा रहे है।
बरसाना के राजकीय स्कूल में न के बराबर पहुंचे बच्चे-जिले के गांव बरसाना के राजकीय स्कूल में शनिवार को दो चार बच्चे ही पहुंचे। लेकिन स्टाफ पूरा मौजूद रहा। अध्यापक पूरा दिन विद्यार्थियों के इंतजार मेें खाली बैठे रहे।
राजकीय स्कूल मूंदड़ी स्कूल में सामान्य रही स्थिति- गांव मूंदड़ी के राजकीय स्कूल में कक्षा दसवीं के 19 विद्यार्थी व कक्षा बारहवीं के 29 विद्यार्थी पहुंचे। दसवीं कक्षा इंचार्ज अध्यापिका रीतू ने बताया कि बच्चों के मेडिकल प्रमाण पत्र के बाद ही कक्षा में अनुमति दी जा रही है। वहीं कक्षा बारहवीं इंचार्ज संजीव कुमार ने बताया कुल 32 विद्यार्थी है। जिनमें से 29 विद्यार्थी स्कूल पहुंचे। सभी के मेडिकल प्रमाण पत्र जमा किए गए हैं। स्कूल प्रिंसिपल रूपचंद ने बताया कि बच्चों की मेडिकल जांच करवाने के लिए दो अध्यापकों की ड्यूटी लगाई गई है। गांव मूंदड़ी में ही पीएचएसी है।
रूटीन में हो रही बच्चों के स्वास्थ्य की जांच- सिविल सर्जन डा. ओमप्रकाश ने बताया कि रूटीन में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। विभाग की ओर से विशेष प्रकार से शिविर लगाने के आदेश जारी नहीं हुए।
स्वास्थ्य विभाग को लिखित में दी गई है सूचना- जिला शिक्षा अधिकारी अनिल शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों पर प्राथमिकता के आधार पर बच्चों के मेडिकल प्रमाण पत्र बनाए जाएं। इसके लिए डीईओ कार्यालय की ओर से स्वास्थ्य विभाग को लिखित में पत्र भेजा है।