संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मैकेनिक और सहायक मैकेनिकों की कमी के कारण कैथल रोडवेज डिपो में बसों की समय पर मरम्मत नहीं हो पा रही है। 63 पद खाली हैं। ऐसे में कम कर्मचारियों के चलते रोजाना दो दर्जन से ज्यादा बसें डिपो में खड़ी रहती हैं और रूटों पर कई बार बीच रास्ते बसें खराब हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है।
कैथल डिपो में 172 रोडवेज बसें हैं। इनमें से 44 बसें बीएस-3, 51 बसें बीएस-4 और 77 बसें बीएस-6 की हैं। बीएस-3 और बीएस-4 की बसें पुरानी हो चुकी हैं और रूट पर चलाने के लिए ये नियमित मरम्मत की मोहताज हैं। वर्कशॉप में 66 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल तीन मैकेनिक ही मौजूद हैं, जबकि सहायक मैकेनिक की संख्या शून्य है।
ऐसे में आईटीआई प्रशिक्षुओं से काम चलाया जा रहा है, लेकिन उन्हें बसों की मरम्मत संबंधी पूरी जानकारी नहीं है। ऐसे में कई बार बसें रूट पर खराब हो रही हैं और कुछ चक्कर रद्द करने पड़ते हैं। 1993 के बाद से स्थायी भर्ती नहीं हुई और हर महीने कर्मचारियों का सेवानिवृत्ति होना समस्या को और बढ़ा रहा है।
इस संदर्भ में वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के बारे में मुख्यालय को लिखा गया है और जल्द ही भर्ती की उम्मीद है। प्रशिक्षुओं की मदद से बसों को ठीक करवाया जा रहा है।
मैकेनिक व सहायक मैकेनिक के मुख्य कार्य
नियमित रखरखाव: तेल बदलना, फिल्टर बदलना, ब्रेक और टायर जांचना, सामान्य सर्विसिंग।
इंजन की मरम्मत: डीजल इंजन की मरम्मत और ट्यून-अप।
सिस्टम की मरम्मत: ब्रेक, स्टीयरिंग, सस्पेंशन, ट्रांसमिशन और हाइड्रोलिक सिस्टम।
इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स: वायरिंग, सेंसर और विद्युत प्रणालियों का निदान और मरम्मत।
सुरक्षा और जांच: बसें सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों और सड़क पर चलने के लिए तैयार हों।
रिकॉर्ड रखना: सभी रखरखाव और मरम्मत कार्यों का रिकॉर्ड।
समस्या-समाधान: बस के खराब होने का कारण पता करना और समाधान करना।