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Kaithal News: सार्थक पहल ः भाषा के प्रति विद्यार्थियों में जागा उत्साह

Wed, 04 Jun 2025 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। आरोही आदर्श माध्यमिक विद्यालय, ग्योंग में मंगलवार को शिक्षा विभाग हरियाणा के निर्देशानुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय भाषा उत्सव मनाया गया। इस मौके पर विद्यालय में भारतीय भाषा पर ग्रीष्मकालीन शिविर का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय भाषाओं के प्रति रुचि, समझ और सम्मान को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम के संयोजक और हिंदी प्राध्यापक डॉ. विजय कुमार चावला ने बताया कि भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है। जनगणना 2011 के अनुसार देश में 1369 मातृभाषाएं, भाषाएं और बोलियां पाई जाती हैं, जिनमें से 121 को आधिकारिक भाषाओं के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह भाषाई विविधता देश की सांस्कृतिक समृद्धि, आपसी एकता और भावनात्मक बंधन को मजबूत करती है।
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डॉ. चावला ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बहुभाषावाद को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देती है। इसमें कहा गया है कि विद्यार्थियों को ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत अधिक से अधिक भारतीय भाषाओं को सीखने और समझने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे न केवल सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भविष्य में विभिन्न भाषायी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो सकेंगे।
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डॉ. चावला ने कहा कि भाषा का ज्ञान केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक पहचान, आपसी सम्मान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक भी है। भाषा सीखना आत्मविकास का सशक्त माध्यम बन सकता है। इस अवसर पर कक्षा छठी के आर्यन, कक्षा सातवीं से मनप्रीत, माफ़ी, जसप्रीत, आरव, प्रिंस, हैप्पी, साहिल व गुंजन ने कक्षा आठवीं से हार्दिक ने कक्षा नौवीं से अरमान और परनीत ने, कक्षा 10वीं से गगनदीप, अंकित, महक, शिवानी, अन्नू, नैंसी, गुरजीत आदि ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों की भाषाई गतिविधियों की प्रस्तुति के साथ हुआ।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं
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विद्यार्थियों ने पोस्टर बनाकर समर कैंप के उद्देश्यों को रेखांकित किया।

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फ्लैश कार्ड्स के माध्यम से अभिवादन, अक्षर, संख्याएं, हस्ताक्षर आदि सीखे गए।

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नवाचारी गतिविधियों के माध्यम से हिंदी भाषायी दक्षता को विकसित किया गया।

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विद्यार्थियों ने डॉ. चावला से भाषा, खेलों के संबंध पर सवाल पूछे और ज्ञानवर्धन किया।

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भाषाई खेलों के ज़रिए विद्यार्थियों ने नए शब्दों का निर्माण कर रचनात्मकता दिखाई।
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