कैथल। जिले के गांव कुलतारन की 18 वर्षीय मुक्केबाज पायल ने साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों के सामने संसाधनों की कमी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकतीं। अपने खेल सफर में पायल ने मुक्केबाजी की दुनिया में ऐसी पहचान बनाई है कि वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन कर रही हैं।
पायल के पिता राजमिस्त्री हैं और मां गृहिणी हैं। इस कारण सफर संघर्षों से भरा रहा है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उसने कभी हिम्मत नहीं हारी। गांव के माहौल और पारंपरिक सोच के बीच उसने बॉक्सिंग को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार मेहनत के दम पर सफलता हासिल की।
पायल खेल महाकुंभ में स्वर्ण पदक जीत चुकी है। पायल इन दिनों कैथल के इंडोर स्टेडियम में 3 जुलाई से इंडोनेशिया के जकारता में होने वाले एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। उनका लक्ष्य भविष्य में ओलंपिक खेलों में देश के लिए पदक जीतना है।
पायल बताती हैं कि उन्हें अपने परिवार के सहयोग और कोच के मार्गदर्शन ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला मिला। बॉक्सिंग कोच अमरजीत ने बताया कि पायल में शुरुआत से ही कुछ अलग करने का जज्बा था। वह सेंटर में प्रशिक्षण लेने आने वाली पहली लड़की थी। उन्होंने पायल में कभी हार या डर का भाव नहीं देखा।
अपनी उपलब्धियों का श्रेय वह अपने पिता की मेहनत, परिवार के सहयोग और कोच के मार्गदर्शन को देती हैं। उनका कहना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।
पायल की प्रमुख उपलब्धियां
जूनियर विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप-2023 : स्वर्ण पदक
जूनियर एशियन चैंपियनशिप-2024 (अबू धाबी) : स्वर्ण पदक
जूनियर नेशनल चैंपियनशिप-2023 : स्वर्ण पदक
जूनियर नेशनल चैंपियनशिप-2024 : स्वर्ण पदक
सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप-2022 : स्वर्ण पदक
हरियाणा स्टेट चैंपियनशिप-2022 : स्वर्ण पदक