मास्क और सामाजिक दूरी कोरोना से बचाव के साथ-साथ क्षय रोगियों के लिए भी एक प्रकार से संजीवनी साबित हुए हैं। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में जुलाई माह के प्रथम सप्ताह तक करीब 13 प्रतिशत तक कम टीबी के मरीज जिले में सामने आए हैं। वर्ष 2020 में 2172 टीबी के मरीज जिले में पाए गए थे, ऐसे में पहले 6 महीने में मिलने वाले औसतन केस 1100 के करीब थे। इस बार अब तक जिले में 950 टीबी के मरीज सामने आए हैं। 150 के करीब केसों की संख्या कम होना अपने आप में एक बड़ी राहत है।
निक्षय पोषण योजना के तहत विभाग मरीजों के खाते में डाल चुका 15 लाख 75 हजार रुपये :-गौरतलब है कि निक्षय पोषण अभियान के तहत टीबी के मरीजों को छह माह तक इलाज व दवाइयों के साथ-साथ हर माह 500 रुपये पोषण भत्ता दिया जा रहा है। इसके अलावा सरकारी व निजी स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी के मरीजों की सूचना देने वाले व्यक्ति को भी प्रोत्साहन भत्ता दिया जा रहा है। ऐसे में अब तक विभाग 15 लाख 75 हजार रुपये राशि मरीजों और सूचनादाताओं के खाते में प्रेषित कर चुका है। पिछले वर्ष विभाग द्वारा 12 महीनों में 60 लाख 52 हजार 500 रुपये मरीजों व अन्य लोगों के खातों में प्रेषित किए गए थे। 11 अस्पतालों में विभाग द्वारा करवाई जा रही जांच :-टीबी के नोडल अधिकारी डॉ. संदीप बातिश ने बताया कि नागरिक अस्पताल सहित जिले में 11 स्थानों पर इस समय टीबी की जांच की जा रही है। इनमें कैथल का नागरिक अस्पताल, पुराना अस्पताल, सीएचसी सीवन, गुहला, कौल, पूंडरी, कलायत व राजौंद शामिल हैं। इनके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खरकां पाई और बालू में जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि उमस भरे मौसम में मरीज ज्यादा आते हैं। दो सप्ताह से ज्यादा खांसी, शाम को बुखार आना, बलगम में खून, छाती में दर्द, सांस फूलने, भूख और वजन कम होने या फिर गर्दन या बगल में गांठ के लक्षण दिखें तो तुरंत इन स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर जांच करवा सकते हैं। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि टीबी के मरीजों के लिए सभी सेवाएं और दवाएं मुफ्त हैं। मरीजों को बलगम के साथ-साथ एचआईवी और शुगर की जांच करवाना भी जरूरी होता है। उन्होंने जिला वासियों से अपील की कि कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करें। इससे अन्य बीमारियों से भी शरीर को बचाया जा सकता है।