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अब ‘तीसरी आंख’ से होगी शहर की निगहबानी

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तमाम प्रयासों के बाद आखिरकार अब कैथल शहर तीसरी आंख की जद में होगा। शहर में 52 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। जिनके लिए पांच कंट्रोल रुम होंगे। यातायात पुलिस प्रभारी इनके इंचार्ज होंगे और शहर में किसी भी अप्रिय गतिविधि होने पर कैमरों की मदद ली जा सकेगी। इसके लिए नगर परिषद ने टेंडर जारी कर दिया है।
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करीब दस साल पहले शहर में दस लाख रुपये की लागत से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। जो लागत के बाद से ही ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। इन कैमरों की मदद से अपराधियों की धरपकड़ में कोई मदद नहीं मिल पाई। जिस कारण समय समय पर इन कैमरों को ठीक करवाए जाने की मांग उठती रहीं। कई कैमरों में से तो डीवीआर तक लापता हो गया। इसके बावजूद नगर परिषद प्रशासन इनकी ओर ध्यान नहीं दे रहा था। अमर उजाला द्वारा इस संबंध में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए गए। नवनियुक्त डीसी से भी इस संबंध में सवाल किया गया था। डीसी के पूछने पर डीएमसी ने कैमरों को दुरुस्त करने की बात कही थी।
एक्सईएन नगर परिषद हिमांशु लाटका ने बताया कि पुलिस के साथ कई दिनों से इस संबंध में पत्राचार चल रहा था। डीएसपी के साथ हुई बैठक में कैमरों के लिए शहर में जगह निर्धारित कर दी गई है। सभी आठ प्रमुख गेटों के साथ-साथ शहर के आउटर इलाकों में चार-चार सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। जिसके लिए जगह फाइनल कर ली गई है। साथ ही पांच जगहों पर कंट्रोल रुम बनाए जाएंगे। इन सभी को ऑनलाइन इंटरक्लेक्टिड किया जाएगा। एसएचओ ट्रैफिक इसके ओवर ऑल इंचार्ज होंगे। नगर परिषद की ओर से कैमरे लगाकर पुलिस को हैंड ओवर कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सिविल वर्क पहले ही पूरा किया जा चुका है। केवल कैमरे लगाने व तकनीकी सुविधाएं जुटाना शेष है। उम्मीद है कि जल्द ही यह सेवा शहर में मिलने लगेगी।
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ईओ बलबीर सिंह ने कहा कि शहर में लंबे समय से मांग उठ रही थी कि सीसीटीवी कैमरे दुरुस्त करवाए जाएं। अब नए कैमरे लगाए जाएंगे। पुरानों को उतार लिया जाएगा। शहर के सभी प्रमुख चौकों पर ये कैमरे लगेंगे। ताकि अप्रिय वारदात में महत्वपूर्ण क्लू मिल सके। एसएचओ ट्रैफिक जयवीर सिंह ने कहा कि सीसीटीवी कैमरों से वारदातों में काफी अहम सुराग मिल जाते हैं। शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के लिए नगर परिषद ने अब काम शुरू किया है। उम्मीद है जल्द ही शहर को यह सुविधा मिलेगी।
सीसीटीवी कैमरों में यदि रिकॉर्डिंग की अच्छी गुणवत्ता के साथ क्षमता है तो आपराधिक वारदात सुलझाने में पुलिस को काफी मदद मिलती है। नई अनाज मंडी में कई साल पहले एक हत्या के बाद फरार हुए हत्यारे के मामले में पुलिस को किसी भी सीसीटीवी कैमरे से मदद नहीं मिल पाई थी। यदि उस समय जींद रोड की ओर के सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे होते तो संभवत: पुलिस को अहम सुराग मिल जाते और इस घटना में संलिप्त हत्यारा आज पुलिस की गिरफ्त में होता।
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