कैथल। केंद्र सरकार द्वारा सोने पर लगाए गए 1 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी के विरोध में पिछले 41 दिनों से बंद पड़ा सर्राफा बाजार खुल गया। बाजार खुलने से दुकानदारों ने राहत की सांस ली है। वहीं जिन लोगों को आभूषण खरीदने हैं, उनकी भी परेशानियां अब कम होंगी। हालांकि हड़ताल 24 अप्रैल तक स्थगित की गई है। लेकिन करीब सवा महीने से ज्यादा समय से बंद पड़े बाजार के खुलने से बुधवार को बाजार में रौनक दिखाई दी।
विदित रहे कि केंद्र सरकार द्वारा आम बजट में आभूषणों पर एक प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी लगाए जाने के विरोध में स्वर्णकार एवं सर्राफा बाजार एसोसिएशन सदस्य हड़ताल पर थे। 41 दिनों से पूरी तरह से बंद पड़े बाजार के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। वहीं दुकानदारों व उन पर कार्यरत कारीगरों सहित अन्य लोगों का रोजगार भी ठप पड़ा था।
बाजार में आए ग्राहकों सुनीता, सोनिया, अशोक कुमार ने कहा कि लंबे समय से बाजार के बंद होने के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही थी। अब पता चला है कि बाजार खुल गया है तो वे अपनी जरूरत अनुसार खरीद करेंगे। सरकार को व्यापारियों की मांगों पर शीघ्र विचार कर उनका समाधान करना चाहिए। ताकि जनता को परेशान न होना पड़े।
24 अप्रैल तक स्थगित की गई हड़ताल:-
सर्राफा एसोसिएशन के प्रधान राजेंद्र गोयल सर्राफ ने बताया कि दिल्ली केंद्रीय एसोसिएशन द्वारा मिले आदेशों की पालना करते हुए दुकानें खोली गई। जिसमें कहा गया है कि सरकार द्वारा 24 अप्रैल तक सोने पर लगाई गई एक्साइज ड्यूटी को वापिस कर लिया जाएगा। गोयल ने कहा कि अगर 24 तक एक्साइज ड्यूटी रद्द नहीं हुई तो 25 अप्रैल से दोबारा सर्राफ व स्वर्णकार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर दुकानें बंद कर बैठ जाएंगे और सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया जाएगा।
इस मौके पर उनके साथ राजेश गर्ग सर्राफ, जितेंद्र चौधरी, अजय सर्राफ, सुंदर लाल वर्मा, राजेश निरवानिया, राजन वर्मा, सत्यनारायण गोयल, विनोद वर्मा, विनय बंसल, डिंपी वर्मा, रामचंद्र प्योतवाले, लवली ज्वैलर्स, अनिश गुप्ता सर्राफ सहित कई सर्राफ व स्वर्णकार मौजूद थे।
जिले में 40 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित:-
हड़ताल के कारण जिले भर में करीब 40 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है। पूंडरी सहित अन्य कस्बों में भी स्वर्णकार एवं सर्राफ हड़ताल पर रहे। जिस कारण न केवल दुकानदारों बल्कि इन दुकानों पर काम करने वाले सैकड़ों कारीगरों व अन्य सहायकों के अलावा आम जनता को काफी दिक्कतें हुईं। हड़ताल के कारण सरकार को आयकर सहित प्रदेश सरकार को वैट का भारी नुकसान हुआ है।